उत्तराखंड डीजीपी से युवाओं की सीधी बात, खोले गए पुलिसिंग के राज !

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IIT-IIM के होनहारों से डीजीपी दीपम सेठ का ओपन हाउस – “युवा ही भविष्य की सुरक्षा की नींव”

देहरादून, 26 जून 2025।

देहरादून के सरदार पटेल भवन में आज कुछ ऐसा हुआ, जिसने पुलिस मुख्यालय को भी ऊर्जा से भर दिया। IITs, IIMs, NLUs और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के 50 मेधावी छात्र-छात्राओं का हुजूम, पुलिस सिस्टम के दिल में, डीजीपी श्री दीपम सेठ से सीधी बातचीत करने पहुँचा। और इस ओपन हाउस मीटिंग में पुलिसिंग के कई अनसुने राज सामने आए।

“युवा ही भविष्य की सुरक्षा की नींव हैं। शासन-प्रशासन को समझना और उससे जुड़ना हर जागरूक नागरिक का हक भी है और जिम्मेदारी भी।” – डीजीपी दीपम सेठ

चारों तरफ चमकती आंखें, सवालों की बौछार, और पुलिस अफसरों के सधे हुए जवाब। माहौल में जुनून था, उत्सुकता थी, और एक मजबूत भविष्य की उम्मीद भी।

साइबर क्राइम से लेकर पुलिस के मिशन तक… हर राज खुला

एसपी सतर्कता रचिता जुयाल ने प्रेजेंटेशन के ज़रिए उत्तराखंड पुलिस की ताकत, मिशन, और लोगों से जुड़ाव की कहानी सुनाई। हर स्लाइड पर तालियां गूंज उठीं।

फिर स्टेज संभाला CO साइबर सेल अंकुश मिश्रा ने। उन्होंने बताया –

  • कैसे डार्क वेब पर होता है गुप्त कारोबार
  • कैसे फिशिंग और डिजिटल फ्रॉड बन रहा है हर घर का खतरा
  • और कैसे उत्तराखंड पुलिस साइबर हेल्पलाइन और स्कूल-कॉलेज कैम्पेन के ज़रिए लोगों को बचा रही है

“सिर्फ एक क्लिक आपकी जिंदगी बदल सकता है। और पुलिस हर क्लिक पर नज़र रख रही है, ताकि आप सुरक्षित रहें।” – CO साइबर सेल, अंकुश मिश्रा

छात्रों के सवाल – पुलिस अफसरों के बेबाक जवाब

IIT के एक छात्र ने पूछा – “क्या पुलिसिंग सिर्फ अपराध रोकने तक सीमित है या समाज को बदलने का जरिया भी?”

डीजीपी सेठ का जवाब था –

“पुलिस सिर्फ कानून की रखवाली नहीं करती। पुलिस समाज को मजबूत करने की सबसे बड़ी कड़ी है। हर पुलिसवाला एक समाज सेवक है।”

युवाओं ने की उत्तराखंड पुलिस की तारीफ

छात्रों ने कहा – “उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में पुलिस की जिम्मेदारी और चुनौतियां दोगुनी हैं। फिर भी पुलिस का जनसंपर्क और तकनीक का इस्तेमाल काबिले तारीफ है।”

अंत में गूंजा एक सवाल – क्या हर युवा को पुलिस सिस्टम जानना चाहिए?

डीजीपी सेठ बोले –

“हर युवा को पुलिसिंग समझनी चाहिए, ताकि वह न सिर्फ अपने लिए, बल्कि समाज के लिए एक जिम्मेदार नागरिक बन सके।”

यह संवाद सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि युवाओं और पुलिस के बीच भरोसे की एक नई इबारत लिखने जैसा था।

👉 सोचिए – अगर युवा पुलिस से जुड़े, सवाल पूछें, और सिस्टम समझें… तो हमारा समाज कितना ज्यादा सुरक्षित, जागरूक और ताकतवर बन सकता है?

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