सूखी पत्तियों से सजे सपने – रुद्रप्रयाग की महिलाएं बनीं उद्यमिता की मिसाल

Share Now

Meru Raibar Print Media | रुद्रप्रयाग से खास रिपोर्ट
🌿 “पिरूल” बना पहाड़ की महिलाओं का सहारा – आत्मनिर्भरता की ओर नया कदम
जखोली ब्लॉक, रुद्रप्रयाग | 28 मई 2025

रुद्रप्रयाग की महिलाएं अब पहाड़ की सूखी पत्तियों से बुन रही हैं आत्मनिर्भरता की कहानी!
जिला प्रशासन के सहयोग और REAP परियोजना के अंतर्गत जखोली ब्लॉक के जवाड़ी गांव की महिलाओं को पिरूल हस्तशिल्प का दस दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण दिया गया है। इस प्रशिक्षण ने न केवल स्वरोजगार के नए द्वार खोले हैं, बल्कि महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी साबित हो रही है।

👩‍🔧 “पिरूल वीमेन” मंजू आर. साह का प्रेरणादायक योगदान

यह प्रशिक्षण “पिरूल वीमेन” के नाम से प्रसिद्ध श्रीमती मंजू आर. साह द्वारा दिया गया। वह खुद पिरूल आधारित हस्तशिल्प से महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। प्रशिक्षण में महिलाओं को सिखाया गया कि कैसे सूखी चीड़ की पत्तियों (पिरूल) से टोकरियाँ, सजावटी वस्तुएं, पेन स्टैंड, ट्रे, गुलदस्ते और अन्य क्रिएटिव उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

♻️ पिरूल: अब खतरे नहीं, कमाई का जरिया

REAP परियोजना के जिला प्रबंधक ब्रह्मकांत भट्ट ने बताया कि पिरूल, जो अक्सर जंगल की आग का प्रमुख कारण बनता है, अब ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का साधन बन रहा है। यह पर्यावरण की दृष्टि से भी सकारात्मक पहल है और आजीविका की दृष्टि से भी।

🏡 घर से ही शुरू हो रही कमाई

प्रशिक्षण के बाद महिलाएं न केवल स्थानीय बाजारों में अपने उत्पाद बेच सकेंगी, बल्कि केदारनाथ यात्रा मार्ग पर यात्रियों के लिए आकर्षक हैंडीक्राफ्ट्स उपलब्ध करवा सकेंगी। इसके साथ ही उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी अपने उत्पादों को देश-विदेश तक पहुंचाने की जानकारी दी गई है।


Meru Raibar का संदेश:
जहां एक ओर पिरूल जंगलों में आग का कारण बनता था, वहीं अब यही पिरूल पहाड़ की महिलाओं की आजीविका का मजबूत सहारा बन रहा है।
स्वरोजगार, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण सुरक्षा – तीनों का संगम है यह नई पहल।


error: Content is protected !!