पहाड़ो में स्वास्थ्य सुविधा देने वाले किसी देवदूत से कम नही।
कैलास रावत पुरोला।
पलायन पर चिंतन के साथ लोगो को गाँव मे सुविधा देकर रोकने की बात विभिन्न मंचो पर खूब प्रचारित की जाती है किंतु धरातल पर उत्तराखंड के सुदूर पहाडी इलाको में धरती का सीना फाड़ कर अपने लिए दो जून की रोटी निकालने में जुटे लोगो की रोजमर्रा की जिंदगी इतनी मुस्किलो से भरी है कि एक बार आर्थिकी कामचलाऊ होते ही लोग यहाँ से भागने में ही भलाई समझने लगते है फिर गाँव के खुले स्वास्थ्य वातावरण के स्थान पर उन्हें घोसले नुमा कमरों में जिंदगी क्यों न गुजारनी पड़े।
उत्तरकाशी जिले के सुदूर हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगे मोरी ब्लॉक के दर्जनों गांवों सड़क से कई किमी दूर होने के कारण स्वास्थ्य सुविधा से वंचित है। कोई भी सरकारी सेवक इन विपरीत परिस्थिति में यहाँ काम करने को तैयार नही होता है ऐसे में कुछ स्वयं सेवी संस्थाओं ने अपने कदम बढ़ाए है।
उत्तरकाशी जिले के सुदूर मोरी विकासखंड में स्वास्थ्य लचर स्वास्थ्य सेवाएं आधुनिक भारत की जो तस्वीर सामने रखती है उस पर कई प्रश्न खड़े होते है।
आजकल मोरी विकासखंड में स्वास्थ्य सेवा का जिम्मा स्वामी विवेकानंद हेल्थ मिशन और उत्तरांचल देवी आपदा समिति ने थाम रखा है। उत्तरांचल देवी आपदा के द्वारा नैटवाड में श्री करण सेवाश्रम चिकित्सा केंद्र भी खोला गया है जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के विभिन्न सुदूरवर्ती क्षेत्रों में निशुल्क चिकित्सा सेवा देना है इस चिकित्सा केंद्र के संचालक योगराज सिंह राणा ने कहा 600 मरीजों को निशुल्क चिकित्सा और जांच चिकित्सा केंद्र में की गई है और अब तक इस क्षेत्र के सबसे सुदूर वरती गांव दोणी, कोटगांव और तालुका हरकी दून में निशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया गया है
बुधवार को धोनी में चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया जिसमें 242 मरीजों को निशुल्क चिकित्सा की गई डॉक्टर बागची जी फार्मेसिस्ट व चिकित्सा केंद्र नैटवाड के संचालक योगराज सिंह राणा आदि द्वारा यहां शिविर संपन्न किया गया
यहाँ सेवा देने वाले कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है बल्कि बहुत न्यूनतम मानदेय पर उत्तरांचल देवी आपदा पीड़ित सहायता समित और स्वामी विवेकानंद हेल्थ मिशन में सेवा भाव से कार्यरत है।



