IAS, PCS, DM सब सस्पेंड – विजिलेंस करेगी जांच!

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“हरिद्वार में घोटाले पर चला बुलडोज़र! दो IAS, एक PCS समेत 12 अफसर सस्पेंड – धामी सरकार का अब तक का सबसे बड़ा एक्शन”


हरिद्वार | Meru Raibar
उत्तराखंड में इतिहास रच दिया गया है! हरिद्वार ज़मीन घोटाले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जो कदम उठाया है, उसे “प्रशासनिक सर्जिकल स्ट्राइक” कहा जा रहा है। इस बहुचर्चित मामले में पहली बार ऐसा हुआ है जब सत्ता में बैठी सरकार ने अपने ही सिस्टम के ऊंचे ओहदों पर बैठे अफसरों को सीधे निशाने पर लिया है।

15 करोड़ की ज़मीन को 54 करोड़ में खरीदा गया — और वो भी ऐसी ज़मीन जो अनुपयुक्त, बेकार और पूरी तरह से गैरज़रूरी थी। नियमों को ताक पर रखकर, पारदर्शिता को दरकिनार कर, हरिद्वार नगर निगम ने एक ऐसा सौदा किया जो अब राज्य की सबसे बड़ी प्रशासनिक शर्मिंदगी बन चुका है।

कार्रवाई की बड़ी लिस्ट:
जैसे ही जांच रिपोर्ट सामने आई, धामी सरकार ने तुरंत 12 अफसरों को निलंबित कर दिया, जिनमें शामिल हैं:

  • हरिद्वार के जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह (IAS)
  • पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी (IAS)
  • एसडीएम अजयवीर सिंह (PCS)
  • वरिष्ठ वित्त अधिकारी निकिता बिष्ट
  • कानूनगो राजेश कुमार
  • तहसील प्रशासनिक अधिकारी कमलदास
  • वैयक्तिक सहायक विक्की
    और बाकी सम्बंधित अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं।

अब इस पूरे घोटाले की जांच विजिलेंस विभाग को सौंपी गई है, जो इस जमीन खरीद के पीछे की गहरी साजिश और ‘सिस्टम सिंडिकेट’ की परतें खोलेगा।


विश्लेषण:
यह सिर्फ कार्रवाई नहीं, उत्तराखंड की राजनीतिक और प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का संकेत है।
धामी सरकार के इस निर्णय ने स्पष्ट कर दिया है कि अब भ्रष्टाचार पर “ना पार्टी चलेगी, ना पद!”

क्या यह उत्तराखंड में सुशासन की नई शुरुआत है?
क्या अब और घोटालों की परतें खुलेंगी?
क्या सिस्टम के भीतर की गंदगी बाहर निकलेगी?

Meru Raibar इस पूरे घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए है – और अगली रिपोर्ट में लाएंगे वो नाम जो पर्दे के पीछे से खेल रहे थे ये बड़ा खेल…


[Meru Raibar – सच्चाई सबसे पहले]
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