“मासूम के सपनों को छलकर ले गया दूर… लेकिन दून पुलिस ने लौटा लाई उम्मीद!
देहरादून की एक मासूम लड़की अचानक घर से लापता हो जाती है। परिवार की दुनिया थम जाती है… हर पल एक सवाल — “कहाँ गई हमारी बेटी?” लेकिन जब उम्मीदें धुंधलाने लगीं, तब दून पुलिस ने वो कर दिखाया जो सच्चे रक्षक करते हैं — 600 किलोमीटर दूर, उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से नाबालिग को सकुशल बरामद कर लिया गया।

💔 ड्रामा और सस्पेंस:
घटना का खुलासा हुआ तब, जब परिजनों ने नेहरू कॉलोनी थाने में बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
जैसे ही मामला सामने आया, पूरे पुलिस महकमे में हलचल मच गई।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले, डिजिटल सर्विलांस लगाया और मुखबिरों को किया अलर्ट।
एक चेहरा सामने आया — देव, उम्र 18 साल, जो नाबालिग को बहला-फुसलाकर उत्तर प्रदेश ले गया था।
🔍 पुलिस की चाक-चौबंद कार्रवाई:
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर
सब-इंस्पेक्टर कमलेश प्रसाद के नेतृत्व में बनी टीम ने दिन-रात एक कर
23 जून 2025 को पीलीभीत के बीसलपुर में छापेमारी की और
आरोपी देव पुत्र दीनानाथ को मौके से गिरफ्तार कर नाबालिग को सुरक्षित बरामद किया।
🧩 आरोपी का प्रोफाइल:
- नाम: देव पुत्र दीनानाथ
- उम्र: 18 वर्ष
- पता: हनुमान मंदिर, नियर इंटर कॉलेज, बरेली (उत्तर प्रदेश)
📜 कानूनी धाराएं:
पुलिस ने शुरुआती मामला धारा 137(2) बीएनएस के तहत दर्ज किया था,
लेकिन लड़की के बयान के बाद इसे पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 और
धारा 65(1) बीएनएस से भी जोड़ा गया।
🗣️ स्थानीय भावना और पीड़ा:
नेहरू कॉलोनी की गलियों में सन्नाटा था —
हर दरवाज़ा बंद और हर आंख सवालों से भरी…
मगर जैसे ही लड़की वापस लौटी, मोहल्ले में एक सुकून की सांस फैली।
“पुलिस ने वाकई हमारी बेटी को बचाया,” एक पड़ोसी ने कहा।
💪 पुलिस टीम की वीरता:
- उपनिरीक्षक: कमलेश प्रसाद
- कांस्टेबल: श्रीकांत ध्यानी
- महिला कांस्टेबल: नीशु चौधरी
इनकी त्वरित कार्रवाई और संवेदनशीलता ने एक परिवार को टूटने से बचा लिया।
✊ अंतिम पंक्ति – सोचने पर मजबूर करता संदेश:
👧 एक नाबालिग को सुरक्षित घर लाने के पीछे थी सिर्फ़ इंसानियत और फर्ज़ की भावना।
जहां बच्चियों की सुरक्षा सवाल बन चुकी है, वहां दून पुलिस का ये कदम उम्मीद की सबसे चमकीली लौ बनकर सामने आया है।
क्या हमारा समाज अब हर मासूम के लिए उतनी ही तत्परता दिखा पाएगा?