“चारधाम यात्रा में स्वास्थ्य और स्वाद का संगम, स्थानीय व्यंजनों से सज रही श्रद्धालुओं की थाली”
“कम तेल-नमक वाले भोजन की पहल को मिल रही सराहना, हिलांस और आंचल कैफे बने पहली पसंद”
संवाददाता – मेरु रैबार, रुद्रप्रयाग
दिनांक – 15 मई 2025
रुद्रप्रयाग:
उत्तराखण्ड की चारधाम यात्रा अब केवल आस्था और आध्यात्म की यात्रा नहीं रह गई है, बल्कि यह अब स्वास्थ्य, स्थानीय संस्कृति और पोषण का भी प्रतीक बनती जा रही है। इस वर्ष यात्रियों के स्वास्थ्य को सर्वोपरि मानते हुए राज्य सरकार द्वारा एक विशेष पहल की गई है। FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के सहयोग से एक स्वास्थ्य उन्मुख भोजन अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत यात्रियों को कम तेल, नमक और चीनी वाले स्वादिष्ट एवं पौष्टिक स्थानीय व्यंजन परोसे जा रहे हैं।
🌾 स्वास्थ्यवर्धक भोजन और स्थानीय स्वाद का मेल
बद्रीनाथ और केदारनाथ हाईवे से लेकर केदारनाथ पैदल मार्ग तक, अब श्रद्धालुओं को मिल रहा है मंडुवा, झंगोरा, बुरांश, माल्टा, आंवला जैसे स्थानीय उत्पादों से बना सुपाच्य व पौष्टिक भोजन। इन व्यंजनों ने न सिर्फ यात्रियों का मन जीता है, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार का भी अवसर प्रदान किया है।
☕ हिलांस और आंचल कैफे – श्रद्धालुओं की पहली पसंद
गुप्तकाशी, सोनप्रयाग, तिलवाड़ा, खांखरा, भीरी और गबनी गांव जैसे स्थानों पर संचालित हिलांस और आंचल कैफे अब यात्रियों की पहली पसंद बन चुके हैं। इन कैफे का संचालन स्थानीय युवाओं द्वारा किया जा रहा है, जहां श्रद्धालुओं को दूध, लस्सी, छाछ, आइसक्रीम समेत कई देसी पेय और भोजन उपलब्ध हैं।
🛣️ स्थानीय लोगों को मिला रोजगार, ग्रामीण खोल रहे हैं ढाबे
रुद्रप्रयाग के जवाड़ी बाईपास मोटर मार्ग पर कालापहाड़ और जवाड़ी गांव के ग्रामीण भी ढाबे चला रहे हैं, जो न केवल यात्रियों को स्वास्थ्यवर्धक भोजन दे रहे हैं बल्कि अपनी आजीविका भी चला रहे हैं। इससे यात्रा मार्ग पर जीवंतता और स्थानीय पहचान को नया आयाम मिल रहा है।
🗣️ यात्रियों ने की सराहना
दिल्ली से आए वरुण, गुजरात के अंकित और फोरम जैसे यात्रियों ने कहा कि इस पहल से उन्हें न सिर्फ स्वास्थ्यवर्धक भोजन मिल रहा है, बल्कि उत्तराखण्ड की संस्कृति और खानपान की झलक भी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि कम तेल-नमक वाला भोजन पर्वतीय यात्रा के लिए एकदम उपयुक्त है।
📣 स्थानीय उत्पादों को मिल रहा बढ़ावा
जिलाधिकारी डॉ. सौरभ गहरवार ने बताया कि इस बार यात्रा में स्थानीय उत्पादों और रोजगार को प्राथमिकता दी जा रही है। होटल, लॉज, ढाबे और दुकानों पर बुरांश, माल्टा, आंवला के जूस, अचार और अन्य उत्पाद यात्रियों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं।
निष्कर्षतः, चारधाम यात्रा इस वर्ष केवल धार्मिक नहीं, बल्कि स्वस्थ और सतत यात्रा का उदाहरण बन रही है – जहां श्रद्धा के साथ-साथ पोषण और परंपरा का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
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(Meru Raibar Print Media | रुद्रप्रयाग ब्यूरो)
