इंद्रमणि बडोनी की जयंती पर आप ने हल्द्वानी से किया महिला गारंटी अभियान की शुरुआत

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ल्द्वानी। आम आदमी पार्टी की डायनामिक नेत्री आतिशी अपने तीन दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुंची। जहां उन्होंने हल्द्वानी से अपने सशक्त महिला समृद्ध उत्तराखंड अभियान के रजिस्ट्रेशन गारंटी की शुरुवात की। उनका गढवाल और कुंमाउ की अलग अलग विधानसभाओं में तीन दिवसीय दौरा है। सबसे पहले आज हल्द्वानी पहुंची आप नेत्री आतिशी  का वहां मौजूद स्थानीय महिलाओं ने जोरदार स्वागत किया। जिसके बाद उन्होंने वहां मौजूद सैकडों महिलाओं के साथ संवाद किया। अपने संवाद की शुरुवात से पहले उन्होंने आज,उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रणेता और उत्तराखंड के गांधी स्व0 इंद्रमणि बडोनी की जयंती पर उनको श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनको याद किया।
उसके बाद महिला संवाद में, उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते आतिशी ने कहा कि हमने दिल्ली में सरकार मे रहते हुए महिलाओं के उत्थान में कोई कोर कसर नहीं छोडी लेकिन आज उत्तराखंड की महिलाएं परेशान हैं। वो पूछ रही हैं कि सरकारों ने हमारे उत्थान के लिए किया क्या है। ना कांग्रेस, ना बीजेपी दोनों ने महिलाओं को हमेशा दरकिनार किया । उत्तराखंड में महिलाओं को ,अपने बच्चों को जन्म देने के लिए भी अपनी जान दांव पर लगानी पडती है। उन्होंने कहा,आजादी के 75 वें साल में भी महिलाएं उत्तराखंड में संघर्ष करने को मजबूर हैं। हर साल लाखों महिलाएं अपने बच्चों को जन्म देती हैं ,लेकिन स्वास्थय सेवाओं का उत्तराखंड में बुरा हाल है। सिर्फ स्वास्थय ही नहीं उत्तराखंड में रोजगार और शिक्षा दोनों का  बुरा हाल है। आज सरकार की अनदेखी के चलते सरकारी स्कूलों को खंडहर बना दिया है। उत्तराखंड के सरकारी स्कूल बदहाल हैं। उन्होंने कहा कि अब प्राईवेट स्कूलों का बोलबाला ज्यादा है। अगर किसी भी घर में एक बच्चे को पढाने का प्राईवेट में मौका मिले ,तो मां बाप बेटी की जगह बेटे को प्राईवेट स्कूलों में पढाते हैं। बेटे को पढ़ लिख जाते हैं लेकिन सरकार की नाकामी का असर बेटियों पर पडता है। सरकारी कमी के कारण बेटियां पढ़ लिख नहीं पाती ।
उन्होंने आगे कहा कि महिलाएं कितनी गंभीर होती हैं यह कोई नहीं समझ सकता। हमारे घर में जब बच्चा बीमार होता है तो हम डॉक्टर पर उसे ले जाते हैं। घरवाले या बुजुर्ग जब बीमार होते हैं तो उन्हें डॉक्टर पर ले जाते हैं लेकिन जब महिलाएं बीमार होती हैं तो वो अपनी बीमारी से ज्यादा घर के खर्चे का पूरा ख्याल रखती हैं। वो आसानी सेअस्पताल नहीं जाती हैं। क्योंकि महिलाएं जानती है कि अगर वो डॉक्टर पर गई तो डॉक्टर 5 सौ रुपये फीस लेगा। और वो महिला पहले अपने घर का बजट देखती है। फिर कहीं जाकर अपनी सेहत के बार में विचार करती हैं।
उन्होंने कहा कि  महिलाएं हर तरफ ध्यान रखती हैं। लेकिन सरकार महिलाओं का उत्तराखंड में ध्यान नहीं रख रही है। सरकार अगर स्वास्थय सेवाओं पर ध्यान ना दें तो इसका असर महिलाओं और बेटियों पर पडता है ,क्योंकि कई महिलाएं इस वजह से दम तोड देती हैं। उन्होंने कहा,आज पहाडों में स्वास्थय सेवाओं के बुरे हाल हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी काम को करने के लिए इच्छाशक्ति की आवश्कता होती है।  7 साल पहले लोग कहते थे कि सरकारी स्कूल खराब होते हैं,सरकारी अस्पताल खराब होते हैं हमने भी यही देखा था लेकिन जब से आप पार्टी की सरकार दिल्ली में बनी, तब से हमने हर चीज का कायाकल्प कर दिया । अब जनता को विश्वास हो गया है कि वाकई में ईमानदारी से अगर काम किया जाए तो यह बदलाव संभव है और अरविंद केजरीवाल जी ने यह करके दिखाया है।

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