“विजय सिंह अमर रहें! शहादत को सलाम, शहीद के नाम पर बनेगा मार्ग – सुबोध उनियाल का बड़ा ऐलान”
- कंडारी गाँव में गूंजा “शहीद विजय सिंह अमर रहें” का नारा
- शहीद की मां और पत्नी के आंसुओं में गर्व और गम की मिली-जुली कहानी
- सुबोध उनियाल ने शहीद के नाम पर सड़क और मूर्ति निर्माण का किया ऐलान
टिहरी के पोखरी ब्लॉक का कंडारी गाँव आज भावनाओं के समंदर में डूबा रहा। वीर सपूत विजय सिंह गुसांई की शहादत पर आंखें नम थीं, पर दिलों में गर्व की मशाल जल रही थी। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री और नरेंद्रनगर विधायक सुबोध उनियाल गाँव पहुंचे, जहां हर शख्स एक ही आवाज़ में कह रहा था —
“शहीद विजय सिंह अमर रहें!”

भोपाल (मध्यप्रदेश) में सेना के प्रशिक्षण के दौरान विजय सिंह गुसांई ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर किए। उनका बलिदान गाँव के कण-कण में गूंज रहा है।
मंत्री सुबोध उनियाल ने शहीद के घर पहुँचकर मां कमली देवी, पत्नी पूजा गुसांई, भाई बिक्रम सिंह और बहनों से मिलकर सांत्वना दी। उन्होंने कहा—
“देश की रक्षा में शहीद हुए वीरों को भारत कभी नहीं भूल सकता। विजय सिंह का नाम इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।”

सड़क बनेगी शहीद के नाम पर
मंत्री उनियाल ने ऐलान किया कि गाँव में “शहीद विजय सिंह गुसांई मार्ग” के नाम से सड़क बनाई जाएगी। इसके लिए विधायक निधि से ₹10 लाख जारी कर दिए गए हैं।
साथ ही, शहीद की याद में गाँव में मूर्ति निर्माण का भी वादा किया। उन्होंने कहा—
“राज्य सरकार हर मुश्किल घड़ी में शहीद परिवार के साथ खड़ी है।”
शहीद की पत्नी की आंखों में आंसू और गर्व
इस मौके पर शहीद की पत्नी पूजा गुसांई की आंखें छलक उठीं। मगर उनके शब्दों में था अडिग हौसला—
“मुझे अपने पति पर गर्व है। मेरे बेटे भी बड़ा होकर देश की सेवा करेंगे।”
उनके दो बेटे हैं— अर्नव (7 साल) और छोटा बेटा 4 साल का। गाँववालों ने उन्हें ढांढस बंधाया और परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।
श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा जनसैलाब
बाद में पोखरी बाजार में हुई श्रद्धांजलि सभा में मंत्री उनियाल, जनप्रतिनिधि, और ग्रामीणों ने शहीद के चित्र पर फूल चढ़ाए। दो मिनट का मौन रखा गया। हर आंख नम थी, पर आवाज़ें बुलंद थीं—
“विजय सिंह तुम अमर हो!”
शहीद विजय सिंह गुसांई की शहादत हमें याद दिलाती है कि देश की मिट्टी पर कुर्बानी देने वाले कभी मरते नहीं। उनका नाम, उनका हौसला, आने वाली पीढ़ियों के दिलों में जिंदा रहेगा।
“क्योंकि सरहद पर खड़े उन जवानों की वजह से ही, हमारा आज और कल महफूज है।”
