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समाज को पढ़ने और पढ़ाने की जिम्मेदारी लेंगे मासूम

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नई पीढ़ी के मासूम बच्चों को उचित और प्राकृतिक माहौल दिया जाय तो बच्चों को शिक्षा देतें देते समाज को भी बेहतर शिक्षित किया जा सकता है। केवल किताबी ज्ञान बच्चों में रटने की प्रवृत्ति को जन्म देता है। हर बच्चे के अंदर कुछ न कुछ टैलेंट अवश्य होता है। यही धै ( आवाज) लगाते हुए सामाजिक संस्था धाध ने फूलदेई कार्यक्रम को आधार बनाकर बच्चों की प्रतिभा को अलग अलग माध्यम से प्रस्तुत करने का बीड़ा उठाया है। चैत महीने में (15 मार्च से) बसंत के आगमन और प्रकृति के स्वागत के लिए उत्तराखंड के पहाड़ी इलाको में फूलदेई मनाया जाता है। जिसमे छोटे छोटे बच्चों द्वारा हर घर की प्रत्येक चौखट पर सुबह धूप निकलने से पूर्व ताजे फूल डालने की परंपरा थी जो नगरों की चौंध के बीच विलुप्ति की कगार पर है, धाध संस्था के बीरेश कुमार में बताया कि पूर्व माध्यमक विद्यालय , 55 राजपुर रॉड पर 15 मार्च को फूलदेई कार्यक्रम स्कूली बच्चों द्वारा किया गया जो पूरे महीने भर चलता रहेगा। इसके साथ ही एक से पांच तक के छात्रों को ड्राइंग के माध्यम से और 6 से 8 तक के छात्रों को लेखन के माध्यम से उनके अंदर की छुपी प्रतिभा को सबके सामने लाने का प्रयास किया गया है।
शिक्षा को सुंदर, सक्षम और सशक्त बनाने के लिए प्रारम्भ होगा मेरे गाँव का स्कूल अभियान
फूलदेई के माह में छात्रों की भागीदारी के साथ धाद उत्तराखण्ड के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों के लिए ‘मेरे गांव का स्कूल’ अभियान प्रारम्भ कर रही है। अभियान उत्तराखंड के सभी निवासियों प्रवासियों से अपने मूल गाँव के स्कूल के पक्ष में खड़े होने की अपील करता है। कोई भी व्यक्ति 100 रुपये मासिक या 1200 सालाना के योगदान के साथ अपने गांव के स्कूल को बेहतर बनाने में भूमिका अदा कर सकता है। अभियान में विद्यालय की कक्षाओं में  रचनात्मक पुस्तकें, खेल का सामान, पौधे के कोने स्थापित किये जायेंगे। कोना कक्षा का के अंतर्गत चलाये जा रहे इस अभियान में अभी तक देहरादून, पौड़ी, उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली पिथौरागढ़, अल्मोड़ा एवं नैनीताल के 150 विद्यालयों में रचनात्मक शिक्षा के कोने स्थापित किये जा चुके हैं।
रंगमंच दिवस पर बच्चों ने नाटक प्रस्तुति के साथ मनाया फुल्देयी
धाद  की पहल पर आयोजित फुल्देयी के अंतर्गत छात्रों ने नाट्य प्रस्तुति के साथ शिरकत की. राजकीय प्राथमिक विद्यालय ब्रहमपुरी पटेल नगर देहरादून के छात्रों ने रंगकर्मी कैलाश कंडवाल के निर्देशन में उत्तराखंड के शहीद सैनिक जसवंत सिंह के जीवन पर आधारित नाट्य प्रस्तुति की जिसमे उत्तरखंड के सैन्य योगदान को याद करते हुए पुलवामा में शहीद उत्तराखंड के जवानों को श्रद्धांजलि दी गयी.
विद्यालय के छात्राओं ने लोकेश नवानी द्वारा रचित महिला जनगीत ऐ लड़की मुस्कुरा तू जोर से हंस खिलखिला लड़की का गायन किया ।
कार्यकम का परिचय देते हुए युवा धाद की सहसचिव आशिया ने बताया की फुल्देयी का आयोजन बच्चों से संवाद का कार्यक्रम है साथ ही इसमें रंग और लेखन की प्रतियोगिता के साथ हम प्रदेश के सैकड़ों बच्चों को रचनात्मक होने के लिए प्रेरित कर रहे है
आयोजन के मुख्य अतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी गजेन्द्र वर्मा ने कहा की नाट्य कला से बच्चों का जुड़ना जरुरी है साथ ही हर सूरत में पढना और बेहतर साहित्य पढना जरुरी है और धाद की कोना कक्षा का की मुहीम बच्चों को दुनिया का श्रेष्ठ साहित्य पहुंचा रही है।
आयोजन के विशिष्ट अतिथि पूरण चन्द भट्ट ने बताया कि धाद की पहल से प्रेरित होकर आज वह इस विद्यालय में तीन कोने स्थापित कर रहे है जहाँ उनके बच्चों ने शिक्षा ग्रहण की है उन्हें उम्मीद है की यहाँ के छात्र इन कोनों के माध्यम से दुनिया का बेहतर साहित्य पढ़ सकेंगे।
इस अवसर पर स्कूलों को कुछ बेहतर किताबों को पहुँचाने के कार्यक्रम एक कोना कक्षा का के तहत राजकीय प्राथमिक विद्यालय ब्रह्मपुरी में श्रीमती विमला भट्ट जी द्वारा विद्यलय के प्रधानाध्यापक श्री दीपक सेठी  , राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय ब्रह्मपुरी श्री पूरण चन्द भट्ट जी  द्वारा विद्यलय के प्रधानाध्यापक श्री नाथी राम पाल  और श्रीमती सत्यवती देवी की तरह से राजकीय प्राथमिक विद्यालय निरंजनपुर मे एक कोना स्थापित किया गया
इस अवसर पर विद्यालय की दीवाल पर युवा धाद क मनिल कंडवाल अपूर्व आनंद द्वारा वाल पेंटिंग की गयी।
कार्यक्रम का सञ्चालन गीता भट्ट ने किया ।
इस अवसर पर धाद अध्यक्ष लोकेश नवानी , सचिव तन्मय ममगाई ,अपूर्व आनंद, नीलम बिष्ट , गीता भट्ट ,कुलदीप कौशल ,अजय , मनिल , शोभा रतूड़ी , सविता जोशी , बृजमोहन उनियाल, भावना कश्यप आदी मौजूद थे।



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