टिहरी गढ़वाल : अगर पेट्रोल पंप करे मनमानी तो ऐसे सिखाये सबक – ये है आरबीआई की गाइड लाइन

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नेशनल हाइ वे पर पेट्रोल पंप की अनुमति लेने से पूर्व पेट्रोल पंप संचालको को उपभोक्ताओ की सुविधा के लिए कुछ मानको का पालन करने के साथ उन्हे कुछ सुविधा देना बेहद जरूरी होता है |

मानक पूरे न होने पर शिकायत मिलने के बाद कभी भी संबन्धित अधिकारी चालनी कार्यवाही कर सकते है | किन्तु उत्तराखंड के चार धाम सड़क मार्ग पर टिहरी जिले के अंतर्गत चंबा के पास धनोला पेट्रोल पंप इन सब मानको को ठेंगा दिखा रहा है | पंप पर टायर मे हवा भरने की जरूरी सेवा नदारद है, वही उपभोक्ताओ को पेट्रोल भरने के बाद 10 – 10 रुपये के सिक्के लेने से पंप संचालक साफ तौर पर इनकार कर भारत सरकार के आरबीआई की गाइड लाइन का साफ उल्लंघन कर रहे है |
ऋषिकेश – चंबा – उत्तरकाशी सड़क मार्ग पर चंबा के पास ये हिदुस्तान पेट्रोलियम का धनोला पेट्रोल पंप है | पेट्रोल भरने के बाद पेट्रोल पम्प संचालक सिक्के लेने से इनकार करते हुए दिखाई देते है |
पंप पर पहुचे उपभोक्ता विपिन पेनुली ने बताया कि अपनी कार मे पेट्रोल भरने के बाद उन्होने 10- 10 रुपये के 22 सिक्के पंप संचालक को दिये , जिसे उन्होने लेने से इनकार कर दिया | पंप संचालक ने दलील दी कि उसके पास कट्टे भर के सिक्के जमा है जिसे बैंक कर्मी भी जमा करने से इनकार करते है, लिहाजा वे भी अपने उपभोक्ताओ से सिक्के लेने से साफ मना कर रहे है |
बड़ा सवाल ये है कि भारत सरकार की करेंसी को कोई भी लेने से कैसे इनकार कर सकता है ? यदि सिक्के नहीं लेने की यही परंपरा आगे भी चल पड़ी तो कोई भी उपभोक्ता सिक्के लेने से ही इनकार कर देगा | फिर भारत सरकार आखिर ये सिक्के बनवा ही क्यो रही है ? और पेट्रोल पंप या कोई भी अन्य संस्थान जिसे भारत सरकार की ये करेंसी नहीं लेनी हो वे साफ साफ सूचना पट क्यो नहीं लगा देते कि उनके संस्थान मे सिक्के नहीं लिए जाएंगे |


इस संबंध मे टिहरी जिले के जिला पूर्ति अधिकारी मुकेश पाल ने दूरभाष पर बताया कि कोई भी पेट्रोल पंप संचालक सिक्के लेने से इन कार नहीं कर सकता इसके लिए न तो राज्य सरकार इजाजत देती है और न पेट्रोलियम कंपनी |
ऐसे मे चंबा के धनोला पेट्रोल पंप संचालक भारत सरकार की पॉलिसी को सीधे तौर पर चुनौती देते नजर आ रहे है | जान कारो कि माने तो आरबीआई कि गाइड लाइन के अनुसार 10 रुपये का सिक्का लेने से इन करने पर आईपीसी कि धारा 124 अ अथवा 188 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज हो सकता है और आरोपी को राजद्रोह मे जेल कि सजा और जुर्माना अथवा दोनों हो सकती है |

देखना होगा कि हिंदुस्तान पेट्रोलियम और टिहरी जिला प्रशासन कब और क्या कार्यवाही करता है |

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