सरकार को दिखाया आईना -प्रशासन की वादा खिलाफी से नाराजी

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शासन और सरकार को दिखाया आईना ।
पेड़ो के सहारे बना डाला वैकल्पिक पुल।
आधा किमी दूरी के लिए 10 किमी का चक्कर।
गिरीश गैरोला।
चामकोट और दिलसौड़ के ग्रामीणों ने पांच वर्षों से संपर्क मार्ग बहाल न किये जाने के विरोध में एक डीएम आफिस में एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया है। विगत 5 वर्षों से गांवो के बीच कनेक्टविटी नही है, बार बार अस्वासन के बाद भी न तो सड़क के टूटे हिस्सेंक निर्माण हुआ और न पुल का।

उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से लगे चामकोट दिलसौड़ और मनेरा के ग्रामीणों को प्रशासन और सरकार से भरोसा उठ गया है लिहाजा इस बार भी ग्रामीणों ने खुद के बाजुओं पर भरोसा जताते हुए गंगा भागीरथी को पार करने के लिए पेड़ो को आरपार डालकर अस्थायी आवाजाही के लिए व्यवस्था कर दी। किन्तु ये प्रयास महज तीन चार महीनों तक ही कारगर रहेगा ।

नदी में जल स्तर बढ़ते ही फिर ये अस्थायी पुल बह जाएगा। विगत पांच  वर्षो से पुल की मांग कर रहे  ग्रामीणों ने 4 जनवरी को जिला मुख्यलय पर डीएम आफिस के बाहर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का निर्णय लिया है और यदि इसके बाद कि कोई हलचल नही हुई तो आगे उग्र आंदोलन करने की चेतवानी दी है।

उत्तरकाशी से मनेरा होते हुए देविधार सड़क मार्ग वर्ष 2012-13 की आपदा में दिलसौड़ के पास डाबरा का ढंगार के पास भूस्खलन की चपेट में आया था जिसमे आधा किमी की सड़क वास् आउट हो गयी थी। वर्ष 2013 में सड़क बनने तक वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर एक ट्रॉली गंगा भागीरथी पर लगाई गई थी जिसमे रस्सी खींच कर ग्रामीण मातली की तरफ से जिला मुख्यलय की ओर आवाजाही कर सकते है। वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरोश रावत में भी इस स्थान पर गंगा के 120 मीटर स्पान का पक्का पुल स्वीकृत किया और इसके लिए लोक निर्माण विभाग प्रांतोय खंड को टोकन मनी भी रिलीज कर दिया किन्तु बजट के अभाव में आजतक पुल निर्माण नही हो सका। ग्राम प्रधान दिलसौड़ विजय सिंह ने बताया कि यदि विभाग आधा किमी के सड़क हिस्से को तैयार कर देता है तो पुल की जरूरत ही नहो है किंतु न तो पुल निर्माण हुआ और न ही सड़क का टूटा हुआ हिस्सा ही बन सका। एक बार वर्ड बैंक लोनिवि खंड भी यह सर्वे कर चुका है। कभी कहा जाता है कि पीएमजीएसवाय  इस सड़क निर्माण करेगा। ग्रामीण नेताओ और अधिकारियों के चक्कर काट कर परेसान हो गए है। कई बार पहले भी कलेक्ट्रेट में ग्रामीण अपनी नाराजी प्रकट कर चुके है।
ग्राम प्रधान बिजय सिंह ने बताया कि सभी पिछले महीने ग्रामीण डीएम आशीष चौहान से मिले थे और उन्हें आश्वासन दिया गया था कि खुद डीएम मौके पर आकर स्थिति का आकलन करेंगे। किन्तु कोई पटवारी तक भी मौके पर नही आया।
नाराज ग्रामीणों ने एक बार फिर 4 जनवरी को एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन कलेक्ट्रेट में करने का फैसला किया है ताकि शासन और प्रशासन को नींद से जगाया जा सके।
गौरतलब है कि इस इलाके में से मनेरा को अब ग्राम पंचायत सड़ नगर पालिका में सामिल किया गया है किंतु न तो गाँव मे पानी की किल्लत दूर हुई और न गांवो के बीच आवाजाही ही सुगम हो सकी। हालात ये के की आमने सामने के घरों को भी कईंकिमी दूरी तय कर पहुचना पड़ रहा है।

https://youtu.be/TVJTTa1w6Mg

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