यूसर्क प्रतिवर्ष वसंत पंचमी को खेती-बाड़ी दिवस के रूप में मनायेगाः प्रो. अनीता रावत निदेशक यूसर्क

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देहरादून। उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवम् अनुसंधान केन्द्र द्वारा देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार के संयुक्त तत्वावधान में एक सतत भविष्य के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का एकीकृत दृष्टिकोण थीम पर राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की गेस्ट ऑफ ऑनर एवम् यूसर्क की निदेशक प्रोफेसर डॉ अनीता रावत ने अपने संबोधन में कहा कि यूसर्क द्वारा उत्तराखंड राज्य में प्रति वर्ष वसंत पंचमी पर्व को ष्खेती बाड़ी दिवसष् के रूप में मनाया जाएगा जिसमें विभिन्न तकनीकियों का प्रयोग करते हुए धरातलीय कार्य किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रथम चरण में यूसर्क द्वारा उत्तराखंड के तीन सीमांत जनपदों चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ के तीन चयनित विद्यालयों में ैज्म्ड प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा रही है। इसके अलावा विज्ञान दिवस के अवसर पर कार्यक्रम में यूसर्क एवम् विद्या सार (स्मार्ट लीप एजुकेशन लीप प्राइवेट लिमिटेड) देहरादून के साथ एम ओ यू किया गया जिसमें विद्यार्थियों को गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, अंग्रेजी विषयों पर कक्षा 9 से 12 तक का स्टडी मैटेरियल ऑनलाइन एवम् ऑफलाइन दोनों रूप से यूसर्क के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यूसर्क द्वारा युवाओं में विज्ञान अभिरुचि बढ़ाने, सृजन दृष्टिकोण एवं मौलिकता के साथ विज्ञान शिक्षा एवम् अनुसंधान संबंधी कार्यों को पूरे प्रदेश में संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति शरद पारधी ने सभी से गंभीरता के साथ विज्ञान चिंतन करने एवम् कार्य करने का आवाहन किया।
यूसर्क के वैज्ञानिक डॉ ओम् प्रकाश नौटियाल ने यूसर्क द्वारा लिए गए मुख्य कार्यक्रमों के बारे में बोलते हुए उनकी उपयोगिता के बारे में बताया। उन्होंने मेंटरशिप कार्यक्रम में पंजीकरण, ज्ञानकोष पोर्टल, यूसर्क यूट्यूब चौनल आदि के बारे में बताया। यूसर्क द्वारा विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियां जैसे ई कंटेंट बनाने कार्य, मेंटरशिप कार्यक्रम, तकनीकी आधारित विज्ञान शिक्षा, ज्ञानकोष पोर्टल, जल शिक्षा कार्यक्रम, जल गुणवत्ता अध्ययन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्मार्ट इको क्लब, टिंकरिग प्रयोगशालाओं की स्थापना आदि पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का स्वागत भाषण देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार के स्कूल ऑफ इंडोलॉजी विभाग के डीन प्रोफेसर सुरेश लाल बरनवाल ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों एवम् अतिथियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवम् मुख्य वक्ता पर्यावरणविद् सच्चिदानंद भारती ने अपने संबोधन में कहा कि हमको पर्यावरण के संरक्षण करने के लिए परंपरागत ज्ञान के साथ साथ वैज्ञानिक सोच के साथ कार्य करना होगा और छोटे छोटे प्रयोगों के माध्यम से लगातार कार्य करते हुए आगे बढ़ना होगा। सच्चिदानंद भारती ने जल संरक्षण के लिए पहाड़ी भूभाग में चलाए गए पाणी राखो आंदोलन, चाल खाल बनाने आदि के बारे में बताया।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में स्पेक्स के सचिव एवम् कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि बृजमोहन शर्मा ने विभिन्न छोटे छोटे वैज्ञानिक प्रयोगों के प्रायोगिक प्रदर्शन के द्वारा जल परीक्षण, खाद्य पदार्थों का परीक्षण करना आदि को सिखाया एवम् विज्ञान को समझने पर बल दिया। सैनिटाइजर की शुद्धता को मापन, पर्यावरण स्नेही प्राकृतिक रंगों को बनाना, मसालों में मिलावट का पता लगाना आदि को बहुत कम खर्च में जांचना सिखाया। श्री शर्मा ने उपस्थित विद्यार्थीओं बताया कि विज्ञान के प्रयोगों के द्वारा हम समाज को जागरूक करके पर्यावरण के साथ साथ मानव स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते है। कार्यक्रम में आए सभी प्रतिभागियों को देव संस्कृति विश्वविद्यालय का भ्रमण कराया गया जिसमें उनको सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट, बायोगैस प्लांट, पेपर प्लांट आदि का भ्रमण कराया गया। कार्यक्रम में यूसर्क के वैज्ञानिक व कार्यक्रम समन्वयक डा. भवतोष शर्मा, डा राजेंद्र सिंह राणा, उमेश जोशी, राजदीप जंग, एवम् देव संस्कृति विद्यालय के डा अरुणेश पाराशर, डॉ उमाकांत इंदौलिया, चन्द्र शेखर, हेमन्त गुप्ता आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम में हरिद्वार एवम् ऋषिकेश के 6 विभिन्न शिक्षण संस्थाओं गायत्री विद्यापीठ हरिद्वार, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज ऋषिकेश, डी एस बी इंटरनेशनल स्कूल ऋषिकेश, जी जी आई सी रुढ़की, जी आई सी गैन्डीखाता, जी जी आई सी ज्वालापुर के 125 विद्यार्थियों सहित 140 लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ ओमप्रकाश नौटियाल द्वारा किया गया।

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