उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से लगे संगम चट्टी डोडी ताल सड़क मार्ग पर ठेकेदार की दबंगता से नाराज असी गंगा घाटी के ग्रामीणों के आंदोलन के बाद अब पीएमजीएसवाई दुबारा से टेंडर कर 6 महीने मे सड़क निर्माण करेगी । वही लोक निर्माण विभाग अभी भी बजट का रोना रो रहा है, ऐसे में धरने पर बैठे असी गंगा घाटी के ग्रामीण आंदोलन समाप्त करने को लेकर असमंजस मे है । दरअसल इसी सड़क का एक हिस्सा पीडबल्यूडी को ट्रांसफर हुआ है ।
अक्सर खबरों की सुर्खियां इस बात को लेकर बनती हैं की किसी गांव या क्षेत्र विशेष में सड़क को लेकर बजट स्वीकृत नहीं है या वन अधिनियम कानून के चलते सड़क निर्माण नहीं हो पा रहा है, लेकिन उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से लगे विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल डोडी ताल के लिए सड़क निर्माण के लिए धन स्वीकृत होने के बावजूद भी ठेकेदार की दबंगता के चलते धरातल पर ही काम नहीं हो पा रहा है । ग्रामीणों ने खुल्लम-खुल्ला आरोप लगाया कि और डीएम विधायक भी ठेकेदार से डरते हैं तो फिर विभाग की क्या कहने?
धरना प्रदर्शन के पहले दिन जब ग्रामीण ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के दफ्तर में जाकर तालेबंदी की और जिला मुख्यालय कलेक्ट्रेट में आकर उग्र प्रदर्शन किया । उस वक्त विभाग कोई भी आश्वासन नहीं दे सका बाद मे चीफ ऑफिस से हरी झंडी मिली तो पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता ने दुबारा टेंडर कर 6 महीने मे सड़क तैयार करने का भरोसा दिलाया ।
दरअसल प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में टेंडर भी चीफ इंजीनियर स्तर से स्वीकृत होते हैं , जिसके बाद एक तरफ ग्रामीणों ने खुशी जताई वही इस बात पर आश्चर्य भी जताया कि जब विगत 6 महीने से सड़क पर कोई काम ही नहीं हुआ था तो इस मार्ग के लिए निर्धारित धनराशि में से करीब 50 हजार रुपये की धनराशि पीएमजीएसवाई ने कैसे खर्च कर दी ? जिसको लेकर मौके पर मौजूद अधिशासी अभियंता सिर्फ इतना ही कह सके कि उनके कार्यकाल में कोई गड़बड़ नहीं हुई है।
बड़ा सवाल यह है कि भले ही पीएमजीएसवाई टेंडर प्रक्रिया चीफ़ इंजीनियर स्तर पर होती हो लेकिन किए गए कार्य की मेजरमेंट और एमबी बुक तो स्थानीय स्तर पर ही भरी जाती है?
लोगों का गुस्सा जायज है कि जब काम ही नहीं हुआ तो फिर 50 लाख अचानक कहां गायब हो गए और किस ने 50 लाख रुपये की एमबी कर डाली
ग्रामीणों का धरना समाप्त हो पाता इससे पहले ही अब लोक निर्माण विभाग के अड़ियल रुख के चलते मामला बिगड़ गया ।
पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर ने साफ तौर पर कहा कि उनके पास यह सड़क पीएमजीएसवाई से ट्रांसफर होकर आई है और इसके लिए उनके पास महज ₹1,80000 का बजट है और इसमें 7 किलोमीटर सड़क का रखरखाव नहीं हो सकता जिसके बाद ग्रामीणों ने निश्चय किया की उनका धरना अभी भी जारी रहेगा और अब उनके निशाने पर पीडबल्यूडी विभाग रहने वाला है ।
ग्रामीणो ने कहा है कि प्रदेश मे सरकार आप के द्वार कार्यक्रम चलाया जा रहा है लिहाजा विभागीय फैसला चाहे चीफ इंजीनियर से हो या अधिशासी अभियंता से सरकार और उसके प्रतिनिधि ही उनके द्वार आकार उनके मांगों को पूरा करेंगे, लिहाजा वे अपने धरना स्थल पर ही डटे रहेंगे
