उत्तरकाशी – 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जिला अस्पताल की होगी कायापलट

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स्वस्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने अपने उत्तरकाशी दौरे मे स्वस्था सेवाओ को लेकर आम जन के मन मे जो उम्मीद जगाई थी उसे पूरा होने मे अभी समय लग सकता है उम्मीद  की  जा रही है कि 2024 के लोक सभा चुनाव तक ये योजना जमीन पर आकार ले लेगी और अस्पताल मे लग रही लंबी कतार से लोगो को कुछ राहत मिलेगी। 

गाँव कस्बो से जायदातार लोगो के जिला मुख्यालय मे शिफ्ट होने के बाद जिला अस्पताल उत्तरकाशी मे मरीजों   की  तादाद दिन प्रतिदिन बढ़ रही है , टिहरी झील निर्माण के बाद बदले भौगोलिक परिदृश्य मे टिहरी जिले के प्रताप नगर क्षेत्र से भी मरीजो का अतिरिक्त भार उत्तरकाशी  जिला अस्पताल पर ही पड़  रहा है ऐसे मे जिला अस्पताल मे वर्तमान संसाधन कम पड़ने लगे है । सीएमओ डॉ पँवार ने बताया कि स्वस्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत कि घोषणा के बाद 50 बेड का अतिरिक्त निर्माण किया जाना है जिसके लिए स्थान का चयन हो गया है निर्माण कार्य दाई संस्था सिंचाई अवस्थापना खंड ने अस्पताल गेट के बाई तरफ सीएमएस कार्यालय कुछ आवास और रेड क्रॉस तक के तीन शेड को तोड़ने कि अनुमति मांगी है जिसके लिए सीएमओ स्तर पर शासन से वार्ता कि फ़ाइल चल रही है  

गंगोत्री और यमुनोत्री तीर्थ धर्मों को अपने मे समेटे और चीन सीमा से लगे उत्तरकाशी जिले मे  स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो जिला मुख्यालय पर स्थित जिला अस्पताल में इस वक्त कुल 18 डाक्टर्स  की कमी चल रही है,  ये अलग बात है कि हड्डी रोग मे एक पद के सापेक्ष जो दो डाक्टर काम कर रहे है ऊनमे से एक डाक्टर भागेंद्र सिंह रावत इस वक्त प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक का प्रभार देख रहे है । जबकि ईएनटी सर्जन के स्वीकृत एक पद के सापेक्ष दो डाक्टर मे से एक डाक्टर विजय बौंठियाल अनुपस्थित चल रहे है साथ ही माइक्रो बायलोजी मे डाक्टर अर्चना मोहन और नेत्र शल्यक डाक्टर स्निग्धा जोशी भी अनुपस्थित चल रही है।  इस तरह चिकित्सा अधिकारी के कुल स्वीकृत 17 पदो मे से 11 पर ही डाक्टर तैनात है जबकि 6 खाली चल रहे है

मजेदार बात यह है कि कुछ पद पर स्वीकृति न होने के बावजूद भी चिकित्सा अधिकारी तैनात हैं । जिला अस्पताल के पैरामेडिकल स्टाफ की बात करें तो जिला अस्पताल में बड़ी तादाद में पैरामेडिकल स्टाफ की कमी चल रही है।  यहाँ भी कुछ पदों पर स्वीकृति न होने के बाद भी काम का लोड  देखते हुए कर्मचारी तैनात किए गए हैं,  जिले में वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी सिस्टर के 12 में से सिर्फ 9 पद भरे हैं और तीन खाली हैं , जबकि जिला चिकित्सालय मे नर्सिंग अधिकारी उपचारिका के 48 पदों के सापेक्ष सिर्फ 15 पर ही कर्मचारी तैनात हैं और 33 पद खाली चल रहे हैं वहीं  जिला चिकित्सालय आईसीयू में उपचारिका के अट्ठारह पदों के सापेक्ष कोई भी कर्मचारी तैनात नहीं है जबकि  ब्लड बैंक में भी  2 पदों के सापेक्ष कोई भी उपचारिका तैनात नहीं है।  इस तरह से कुल उपचारिका के स्वीकृत 68 पदों में 15 पद कार्यरत हैं जबकि 53 पद खाली चल रहे हैं जबकि संपूर्ण नर्सिंग  संवर्ग में 83 पदों के सापेक्ष 24 पर ही कर्मचारी तैनात हैं जबकि 59 पद खाली चल रहे हैं ।

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