करण मेहरा उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के 1 वर्ष पूरा होने का जश्न मना रहे हैं। 1 साल बेमिसाल नाम भी दिया जा रहा है ।
अब ये साल कितना बेमिसाल रहा है और यह कांग्रेस के लिए बेमिसाल रहा है या सिर्फ करण माहरा के लिए बेमिसाल रहा है?
चर्चा इस बात को लेकर तेज होने लगी है । वह इसलिए कि कांग्रेस का एक खेमा पूरी तरह से नाराज है । प्रीतम सिंह को लेकर तरह-तरह की अटकलें हैं , चर्चाएं हैं ।
इसके अलावा तिलकराज बेहड़ जो किच्छा से विधायक रहे हैं उनकी भी नाराजगी की भी खबर आई है । यहां तक कि उनकी बीजेपी में जाने कीभी अटकले है इस बीच नका जो बयान आ रहा है यह बयान धड़कन बढ़ाने वाला है
तिलकराज बेहड़ को लेकर बहुत सारी चर्चाएं हैं उनकी उनके बीजेपी में जाने की अटकलें भी तेज हैं और इस बीच उनका यह बयान कि संगठन में उनकी अनदेखी हो रही है या उनको पूछा नहीं जा रहा है , इससे संकेत साफ है कि उनके मन में बहुत उथल-पुथल चल रही है और इस उथल-पुथल को हवा दे रहे हैं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी
सियासत संभावनाओं का खेल है और उन संभावनाओं को टटोल रहे है गणेश जोशी और अगर ये संभावनाए आगे बढ़ती हैं तो फिर संकट कांग्रेस के लिए बढ़ेगा, करण माहरा के लिए बढ़ेगा। करण महाराज जिस तरीके से पार्टी को एकजुट करने की बात करते हैं तो वही तिलकराज बेहड़ डेडलाइन सेट कर रहे हैं वो भी लोकसभा चुनाव तक की
बेहड़ भले ही चर्चाओं को बेबुनियाद बता रहे हो लेकिन अगर चर्चाएं हो रही हैं तो उसकी कुछ तो वजह जरूर होगी और यही वजह कांग्रेस शायद तलाश नहीं कर पा रही है और प्रीतम की नाराजगी भी जगजाहिर है उनका तो सीधा मोर्चा प्रभारी पर है
प्रभारी को लेकर प्रीतम सिंह की नाराजगी विधानसभा चुनाव के बाद से ही चल रही है जबकि करण माहरा प्रभारी की तारीफ करते नहीं थकते हैं और यही सियासत चल रही है यही टकराव है,
टकराव की बहुत सारे अलग-अलग वजह हैं और इसी टकराव में बीजेपी एक रास्ता अपने लिए तलाश कर रही है और कांग्रेस की कमजोर कड़ी पर चोट कर रही है ताकि कांग्रेस को और हिलाए जा सके कांग्रेस की जड़ों को और कमजोर किया जा सके – राजनीति इसी का नाम है- यही सियासत का खेल है
तिलकराज बेहड़ और प्रीतम सिंह को लेकर जो भी चर्चाएं चल रही हैं उनसे कोई इंकार नहीं कर रहा था उनको आगे ही बढ़ाने की कोशिश हो रही है॥
इस बीच कांग्रेस की ओर से यह जरूर कहा जा रहा है करण माहरा ने यह बात जरूर कही है कि प्रीतम सिंह को टारगेट किया जा रहा है उन्हें बदनाम करने की कोशिश हो रही है लेकिन बयानों को अगर सिलसिलेवार समझने की कोशिश करें करें तो पहले तिलकराज बेहड़ कहते हैं गढ़वाल के अनदेखी हो रही है फिर कहते हैं संगठन को पूछ नहीं रहा – उनकी अनदेखी हो रही है॥
प्रभारी पर प्रीतम सिंह लगातार निशाना साध रहे हैं और यही सियासत का खेल होता है जहां सिर्फ संकेत दिये जाते हैं और संकेत शायद कांग्रेस समझ नहीं रही है और अब कब तक समझेगी समझेगी अब इसी पर सभकी निगहे लगी है
