कांग्रेस का हमला — “मानसून में चुनाव, लाखों लोगों की ज़िंदगी से खिलवाड़!”
उत्तराखंड में मानसून कहर बरपा रहा है… पहाड़ खिसक रहे हैं, सड़कें बह रही हैं, और आसमान आफ़त बरसा रहा है। इसी बीच, धामी सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का ऐलान कर दिया है — वो भी जुलाई में, जब बारिश का मिजाज सबसे खतरनाक होता है।
इसी फैसले पर अब सियासत उबाल पर है।
“लाखों लोगों की जान जोखिम में डाल रही है धामी सरकार!”
ये कहना है जिला कांग्रेस कमेटी टिहरी गढ़वाल के अध्यक्ष राकेश राणा का। उनकी आवाज़ में गुस्सा ही नहीं, डर भी साफ झलक रहा था।

“जब चार धाम यात्रा तक बंद कर दी गई, स्कूलों में छुट्टी कर दी गई, सैकड़ों सड़कें धंसी पड़ी हैं… तब सरकार को चुनाव कराने की पड़ी है? ये जनता के साथ क्रूर मजाक है!”
— राकेश राणा, कांग्रेस नेता
बरसात की बर्बादी, फिर भी चुनाव!
- पिछले दो दिनों की बारिश में ही प्रदेश का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है।
- 108 सड़कें पूरी तरह बंद, 17 आंशिक रूप से खुली।
- आपदा में कई जानें जा चुकीं।
- फिर भी 2 जुलाई से पंचायत चुनाव के नामांकन की प्रक्रिया शुरू!
राकेश राणा का सवाल है — “जुलाई का महीना हमेशा आपदा लेकर आता है। जब पिछले सात महीने सुरक्षित थे, तब सरकार ने चुनाव क्यों नहीं कराए?”
सियासी साजिश का आरोप
राणा यहीं नहीं रुके। उन्होंने सरकार पर चुनाव को जानबूझकर टालने और अब बरसात में कराने की साजिश का आरोप जड़ दिया।
“सरकार पंचायतों में प्रशासक बिठाकर सत्ता पर कब्जा करना चाहती थी। जब राज्यपाल ने अध्यादेश खारिज किया, तब मजबूरी में बरसात में चुनाव करवा रही है। ये लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है।”
— राकेश राणा
महिलाओं और ग्रामीणों पर संकट
कांग्रेस का तर्क है — भारी बरसात में कैसे महिला प्रत्याशी, ग्रामीण और कर्मचारी सुरक्षित चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे?
“सड़कों पर मलबा, नदियां उफान पर… ऐसे में महिलाएं नामांकन करने कैसे आएंगी? प्रचार कैसे होगा? सरकार क्या उनकी जान की गारंटी लेगी?”
— राकेश राणा
कांग्रेस को शक है कि “भाजपा खराब मौसम का फायदा उठाकर चुनाव को अपने पक्ष में मोड़ सकती है।”
⚡ “सवाल एक ही है — वोट की राजनीति बड़ी है या लोगों की जान? बारिश के इन खतरनाक दिनों में फैसला वाकई सत्ता के लिए है… या जनता के लिए?” ⚡
