Uttarkashi
उत्तराखंड की चार धाम यात्रा संपूर्णता की तरफ बढ़ रही है | चारो धाम मे कपाट बंद होने का सिलसिला सुरू हो गया है | दिवाली के अगले दिन अन्नकूट के मौके पर गगोत्री धाम के कपाट बंद हो गए है | गंगोत्री धाम से पैदल डोली यात्रा रात्री विश्राम देवीमंदिर मे करती है | इस बार गंगोत्री धाम मे कपाट बंद होने के साथ हो चारो धामो मे भारी बर्फवारी के बाद कड़ाके की शर्दी सुरू हो गयी है | गंगोत्री धाम ने भी बर्फ की सफ़ेद चादर ओढ़ ली है वही गंगा माता की डोली यात्रा के साथ श्राद्धलु और गंगोत्री तीर्थ धाम के पुरोहित भी बर्फवारी के बीच कड़ाके की शर्दी के साथ देवी मंदिर मे रात भर अलाव जलाकर गंगा माता के भजन कीर्तन करते रहे |
आज भैया दूज के पावन मौके पर गंगा की भोग मूर्ति डोली मे अपने मायके मुखवा मे पहुचेगे| गंगा माता के भाई समेश्वर देवता की डोली, अपनी बहिन लेने पहुचती है और भाई दूज के लिए पूरे मुखवा गाव को विशेश रूप से सजाया गया है | दरअसल गंगा, देश और दुनिया मे माँ के रूप मे पूजी जाती हो किन्तु मुखवा के निवासियों के लिए गंगा आज भी एक बेटी है- एक बहिन है , और उसी अनुरूप बेटी के मायके आने पर स्वागत की तैयारिया की जाती है
