बोलने वालों की संख्या के आधार पर चीनी के बाद विश्व की दूसरी सबसे बडी भाषा – हिन्दी

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जब हम हिंदी का परीक्षण करते हैं तो पाते हैं कि वह न्यूनाधिक मात्रा में प्राय: सभी निष्कर्षों पर खरी उतरती है। आज वह विश्व के सभी महाद्वीपों तथा महत्त्वपूर्ण राष्ट्रों- जिनकी संख्या लगभग एक सौ चालीस है- में किसी न किसी रूप में प्रयुक्त होती है। वह विश्व के विराट फलक पर नवल चित्र के समान प्रकट हो रही है। आज वह बोलने वालों की संख्या के आधार पर चीनी के बाद विश्व की दूसरी सबसे बडी भाषा बन गई है।इसी कड़ी में विश्व स्तर पर दिनांक 5 फरवरी सरस्वती पूजा के दिन हिन्दी विभाग,श्री वेंकटेश्वर महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय अपने हीरक जयंती के उपलक्ष्य में वैश्विक हिन्दी: स्थिति व संभावनाएं विषय पर विश्व के नामचीन विद्वानों का व्याख्यान आयोजित किया गया। जिसमें सोफिया युनिवर्सिटी, बुल्गारिया की प्रो. मिलेना ब्रातोइवा, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी,अमेरिका से प्रो. ग्रेबिएला निकेलिएवा, युनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिख, स्विट्जरलैंड से डाॅ. माइरेला ग्राफे, तोक्यो युनिवर्सिटी ऑफ फाॅरेन स्टडीज, जापान से सुश्री. साकुरा इशिकावा व एक और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी अमेरिका से ही सुश्री. भव्या सिंह ने अपने व्याख्यान के माध्यम से अपने विचारों को रखा।


शुरुआत में वक्तव्य के लिए आयी प्रो. मिलेना ब्रातोइवा ने बताया की हमारे देश में हम हिन्दी को सिर्फ एक भाषा के रूप में नहीं बल्कि साहित्यिक स्तर छात्रों को तैयार करते हैं। जिसका उदाहरण है कि विद्यार्थी हिन्दी को बिना अंग्रेजी का मदद लिए सीधे बुल्गारियन में अनुवाद करते हैं।इसके बाद अमेरिका से जुड़ी प्रो.ग्रेबिएला ने कहा कि हम वास्तविक हिन्दी पर विशेष जोर देते हैं ताकि हमारे विद्यार्थी हिन्दी में पकड़ बना सके। उन्होंने बताया कि व्यापार में व अस्पतालों में हिन्दी का अधिक प्रयोग होता है। हम मुख्य रूप से हिन्दी के साक्षरता को ध्यान में रखते हैं।इसके बाद स्विट्जरलैंड से डाॅ. माइरेला ग्राफे जी ने बताया कि हमारे यहां हिन्दी का अध्ययन भारतीय संस्कृति और समाज के स्तर पर होता है।अमेरिका से ही सुश्री. भव्या सिंह ने कहा कि हम विभिन्न तरीकों से हिन्दी को सीख सकते हैं। उन्होंने अपने द्वारा बनाए गए परियोजना को भी रखा।जापान से सुश्री. साकुरा इशिकावा ने भी
हिन्दी सीखने के उपाय के विषयों में बताया जैसे फिल्मों के माध्यम से हम हिन्दी को सहज रुप में सीखते हैं।

कार्यक्रम का संचालन विभाग प्रभारी डॉ ऋचा मिश्र ने किया। उन्होंने महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सी शीला रेड्डी को स्वागत व्यक्तव्य के लिए आमंत्रित करते हुए विद्वान वक्ताओं का श्रोताओं से परिचय कराया साथ ही साथ धन्यवाद ज्ञापन भी किया।इस अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में विश्व भर के कई शोधार्थी जुड़े हुए थे। विभाग की एक अन्य सदस्य डॉ अर्चना जो इस आनलाईन कार्यक्रम का तकनीकी संचालन कर रही थी।
इन्होंने विद्यार्थियों व श्रोताओं से आ रहे प्रश्नों को वक्ताओं के समक्ष प्रस्तुत किया। जिसका उत्तर विद्वानों ने बड़ी सरलता से समझाकर दिया।इस अंतरराष्ट्रीय वेबिनार से विद्यार्थियों के साथ साथ शोधार्थियों व अध्यापकों में मन में कई उमड़ रहे प्रश्नों का उत्तर मिला। यह कार्यक्रम यह भी दर्शाती है कि आज भी हिन्दी को लेकर कई बड़े संस्थान आज भी सक्रिय हैं। श्री वेंकटेश्वर महाविद्यालय दिल्ली विश्वविद्यालय से साथ पुरे भारत वर्ष में अपने उत्कृष्टता का श्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। ऐसे कई राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों से विद्वानों और विद्यार्थियों व हिन्दी प्रेमियों को जोड़ने का निरन्तर काम कर रहा है।

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