जनपद उत्तरकाशी मे स्थित सीमान्त ग्राम नेलांग एव जादुग के जाड़ भोटिया जनजाति के लोगो ने राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी से उनके गाँवो को फिर से मूल स्थान पर बसाए जाने के लिए संसद में मामला उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सीमांत गाँव के इस मामले को राज्य सभा मे उठाया जाना चाहिए। ताकि उन्हें विस्थापन के बाद फिर से मूल स्थान पर बसाया जा सके। गौरतलब है कि चीन के साथ युद्ध के बाद उन्हें गाँव से हटा दिया गया था।
विस्थापन या दुबारा ग्राम को बसाया जाये के सम्बन्ध का मामला संसद उठाये । बताते चले कि सन् 1962 में भारत चीन के युद्ध के कारण देश की सुरक्षा को देखते हुये राजस्व ग्राम नेलंग एवं जादुंग के लोगो को गाँव से खाली करा दिया गया था, जिसके बाद जाड़ भोटिया जनजाति के लोग 57 वर्षों से बगोरी एवं वीरपुर डुण्डा मे बगैर सरकारी सहायता एवं विस्थापन के रह रहे है ।किन्तु इतने वर्षों के बाद की केन्द्र सरकार एंव राज्य सरकार के द्वारा उनकी विस्थापन एवं प्रतिकर की समस्या का समाधान नही हुआ है । सभी ग्रामवासी 57 वर्षों से केन्द्र एवं राज्य सरकार से पत्राचार एव मौखिक रुप से अवगत कराते रहे है आज तक किसी भी सरकार ने इस समुदाय की कोई सुध नही ली है।
भोटिया जनजाति ग्राम वासियो ने अपील की है कि उन्हें जमीन का विस्थापन एवं प्रतिकर दिया जाये या समस्त ग्राम वासी को नेलंग एवं जादुग को दुबारा बसाया जाये क्योकि वर्तमान समय मे वह भोटिया जनजाति के पास न तो कृषि योग्य भूमि एवं न कोई रोजगार का साधन है। 7 नवंबर 18 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जब उत्तरकाशी के हर्सिल में आये थे और उन्होने सेना,भा०ति०सी०पु०बल एवं स्थानीया ग्रामीणों के साथ दिपावली मनायी थी उस बक्त भी प्रधानमंत्री मोदी को ग्राम प्रधान एवं अन्य ग्रामीण ने इस मामले को मौखिक रूप से अवगत कराया। उन्होने ग्राम प्रधान एवं ग्रामीणों आश्वसन दिया कि इस मामले को देखगें। अब ग्रामीण पीएम मोदी से हुई मौखिक वार्ता के बाद विस्थापन की उम्मीद लगाए बैठे है।


