नर्मदा बचाओ आंदोलन की संकल्प सभा में सेंचुरी सत्याग्रही आंदोलन के साथीयों ने लिया संकल्प मिल्स चालू करने और रोजगार बचाने का |
17 अक्टूबर 2017 से मिल बंद होने से आज भी वेतन पाकर मिल के बाहर सत्याग्रह पर बैठे हैं श्रमिक |
656 दिन का सत्याग्रह और 388 दिन का क्रमिक अनशन जारी रहेगा |
अंकित तिवारी
बड़वानी | सेंचुरी मिल्स के बंद होने को लगभग दो साल हो चुके हैं | लेकिन सेंचुरी के श्रमिक आज भी मिल्स चालू कर रोजगार देने की मांग को लेकर सेंचुरी मिल्स के बाहर सत्याग्रह पर बैठे है | 17 अक्टूबर 2017 से मिल बंद की गई थी और मात्र ढाई करोड़ रूपये में वेरियट ग्लोबल नाम की कंपनी को ढाई सौ करोड़ की संपत्ति बेचने का फर्जी बिक्रीनामा / रजिस्ट्री बनायी गयी, जिसे औद्योगिक ट्रिब्यूनल ने और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने भी ख़ारिज किया ! जिससे करीब 1000 से ज्यादा लोगों का रोजगार छीन गया |

आज भी श्रमिक अपने अधिकार रोजगार के अधिकार की लडाई लड़ रहे हैं. लेकिन कंपनी रोजगार न देते हुए मात्र VRS देने की बात कर रही थी , जबकि 90 % श्रमिक और 50 % कर्मचारी, कुछ अधिकारी भी VRS न लेते हुए मात्र मिल्स को चालू कर रोजगार की मांग पर अडिंग है | कंपनी अब कोई वायदा न करते हुए, चार युनियन्स के 10% से भी कम श्रमिक साथियों की VRS की मांग होने का कारण देकर मिल्स देने का विकल्प नकार रही है | जबकि 4 युनियन्स को कुल 10%से कम श्रमिकों का समर्थन है और करीबन 90 % श्रमिक मेधा पाटकर जी की अध्यक्षता में चलाई जा रही श्रमिक जनता संघ (हिंद मजदुर सभा से संलग्न) युनियन के सदस्य होकर रोजगार के ही पक्ष में है तब उनका प्रतिनिधित्व श्रमिकों ने चुने प्रतिनिधी कर सकते हैं – युनियन्स नहीं !
सेंचुरी के साथीयों के सत्याग्रह को आज 656 दिन हो चुके है और क्रमिक अनशन को 388 दिन हो गये है लेकिन मिल्स प्रबंधन इस सबको देखने के बावजूद नजर अंदाज कर रहा है सेंचुरी मजदूरों की लड़ाई लड़ने में महिलाओं का भी बड़ा योगदान है वह चाहे क्रमिक अनशन करना हो या फिर कहीं पर भी प्रदर्शन | महिलाये भी मिल्स चालू करने और रोजगार की मांग पर अडिंग है |
सेंचुरी सत्याग्रह आंदोलन के श्रमिकों को कोर्ट के फैसले अनुसार हर महीने की तनख्वाह तो मिल रही है लेकिन रोजगार न मिल पाने से आज भी वह रोजगार के लिये संघर्षरत है | जबकि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के 6 फरवरी 2019 के आदेश अनुसार मिल्स को चालू करके श्रमिकों को रोजगार देने की बात की गई थी उस आदेश का भी सेंचुरी मैनेजमेंट की तरफ से अव्हेलना की जा रही है | और वह भी मिल्स घाटे में होने तथा यार्न व डेनिम को मार्केट न होने की एवम मशिनरी काफी पुरानी होने की झूठी बात का आधार लेकर !
नर्मदा बचाओ आंदोलन से सेंचुरी सत्याग्रह आंदोलन के श्रमिकों ने अपनी लड़ाई को आगे बढ़ाया है | नर्मदा के पानी पर , घाटी के ही क्षेत्र में कार्यरत कंपनीयों की खबर बात लेना एवम वहाँ की न्याय – अन्याय की स्थिति जांचना जरुर होतो संघर्ष करना जरूरी माना है | नर्मदा बचाओ आंदोलन विगत दो साल से सेंचुरी के श्रमिको को नर्मदा आंदोलन के साथ किसान – मजदूरों के आंदोलन में योगदान रहा है हर जायज समता – न्यायवादी संघर्ष में सेंचुरी सत्याग्रह आंदोलन के मजदूर साथ में खड़े रहते हैं | संघर्ष के साथ निर्माण में भी लगे है | केरल के बढ़ ग्रस्तों के लिये राहत कार्य, हातमाग पर कपड़ा बुनना, बच्चों का कलापथक, क्षेत्र के गावं – नगर की सफाई का अभियान आदि कार्य एकता के साथ जरूरी रहा है |
विगत 31 जुलाई को नर्मदा बचाओ आंदोलन की संकल्प सभा में सेंचुरी मिल्स के सैंकड़ो श्रमिकों ने भी शामिल होकर संकल्प लिया की जब तक मिल्स सेंचुरी प्रबंधन मिल्स चालू करें या हमें ना दे, तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे |