सरदार सरोवर परियोजना में 122 मीटर पानी भरने के फैसले पर नाराजी।

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 सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े लोगों ने बिना विस्थापन के  पुनर्वास किये घर आंगन जमीन यहाँ तक कि पेड़ पौधों को भी डुबाने पर नाराजी दिखाई है।उप दल, नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण, नई दिल्ली को लिखे ज्ञापन में लोगो ने इस तरह अपनी पीड़ा बयां की है।
अंकित तिवारी

महोदय,

   हम और आप भी जानते हैं कि सरदार सरोवर के विस्थापन और पर्यावरणीय मुद्दे सालों से चर्चित रहे हैं। विस्थापितों की संगठित शक्ति ने हर मोड़ पर कानून, नीति और अदालतों के फैसलों के अनुसार संपूर्ण पुनर्वास के बिना घर, खेत, गांव, दुकान या पेड़, मंदिर-मस्जिद डुबाई नहीं जाए, यह आग्रह रखा है। उसी से नर्मदा घाटी के इस एकमात्र बांध में हजारों को जमीन मिली है, घर-प्लाट आवंटित हुए हैं तथा पुनर्बसाहटों का निर्माण हुआ है। लेकिन आज भी डूब क्षेत्र में करीबन 30 हजार परिवार बसे हैं। आज भी डूब क्षेत्र में न केवल हजारों मकान बल्कि हजारों हेक्टेयर उपजाऊ, फलोद्यान तक की खेती, लाखों पेड़, सैकड़ों धार्मिक- सांस्कृतिक स्थल, सैकड़ों दुकानें, व्यवसाय बसे हुए होते, सरदार सरोवर में 122 मीटर से अधिक पानी भरना अन्याय, अत्याचार ही नहीं, कानून और फैसलों की अवमानना होगी। 

· आपने आज तक डूब क्षेत्र की एवं बसाहटों की मुलाकात नहीं ली है, ना ही हमारे साथ बातचीत हुई है। हमने देखा है कि मंत्री जी को गलत जानकारी दी जाती रही है। आप जल्दी से जल्दी हमारी सुनवाई करें, यह जरूरी है।

· आप कृपया देखें कि महाराष्ट्र और गुजरात में भी कितने आदिवासियों को पात्रता अनुसार पुनर्वास के सभी लाभ मिलना बाकी है। ‘0’ बैलेंस बताने वाले शासकीय रिपोर्ट्स दूर रख कर धरातल की स्थिति की स्वयं जांच करें।

· आप जांच लें कि 2017 के पहले भी कोर्ट में शपथ पत्रों/ रिपोर्टों में ‘0’ बैलेंस दिखाया जाता था लेकिन उसके बाद 900 करोड़ रुपए का पैकेज मध्यप्रदेश शासन ने 2017 में घोषित किए, कई आदेश निकले,– आज तक उनका पालन पूर्ण नहीं हुआ है। किसान, मजदूर, मछुआरे , दुकानदार, कुम्हार, केवट सभी में से जिन हजारों को लाभ लेना है, वे अर्थात मूल गांव में ही रहेंगे और कहां ? उन्हें अपने पीढ़ियों की संपत्ति एवं आवास व आजीविका के आधार के साथ जीने-रहने का अधिकार है और रहेगा।

· आप जाने कि पुनर्वास स्थलों पर सुविधाएं, पीने के पानी तक ना होने से वहां रहने वाले भी हैरान हैं।

· शिकायत निवारण प्राधिकरण के आदेश, वन अधिकार कानून, पेशा कानून का भी उल्लंघन कई गांव फलिये या मोहल्ले में भी स्पष्ट दिखाई देता है।

· अवैध रेत खनन भी जारी है जिसमें कई हत्याएं जबकि नर्मदा की ही हत्या होती जा रही है…. दिन-ब-दिन। इसके लिए न केवल खनिज और राजस्व, पुलिस विभाग बिना नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण स्वयं भी जिम्मेदार है, इनके बीच गठजोड़ भी है।

  इस राज्यवार स्थिति को आपसे जांच कर, जो गलत, अवैध है, उसे रोकना, प्राधिकरण के अधिकार में कानून पालन के आदेश देना, सत्यवादी रिपोर्ट पेश  करवाना यह है नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की अंतर् राज्य व केंद्रीय संस्था का कर्तव्य एवं जिम्मेदारी है। 

    आप की अध्यक्षता में गठित पुनर्वास दल से कोई जांच परख ना होते हुए नर्मदा घाटी के डूब क्षेत्र के गांव की ताजा स्थिति, आंकड़े, केंद्र या राज्य का ही नहीं विस्थापितों का हित देखना जरूरी होते हुए, इन सब कानूनी प्रक्रिया के बिना आपका उप दल या प्राधिकरण ऐसा कोई निर्णय नहीं ले सकता, जो कानून व न्याय के बदले, अमानवीय विस्थापन थोपेगा। 

  आज तक जो पुनर्वास का कार्य, विशेषत: सरदार सरोवर मे ही, हुआ है, उसे मंजूर करते हुए, हम समझते हैं कि आप भी जानते होंगे कि यह सब पूरा होना अभी बाकी है। अभी भी हजारों परिवारों के लिए अस्थाई पुनर्वास पर करोड़ो रुपए खर्च करना बिल्कुल जरूरी नहीं है। 

   जरूरी है कि आप राज्य सरकारों से सत्य आधारित रिपोर्ट मांग कर घाटी की मुलाकात लेकर, हमारी गहरी सुनवाई के बाद ही निर्णय लें कि सरदार सरोवर संबंधी पानी भरने की या विस्थापन  थोपने की बात कैसी हो सकती है? 

   नर्मदा घाटी के लोग, हजारों की ओर से बड़ी तादाद में आप तक आज यह चेतावनी पहुंचाना चाहते हैं कि आप के नेतृत्व में न्याय पूर्णता न बरतने पर हमें अहिंसक संघर्ष फिर तेज करना होगा। 

 
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