2002 की नियमावली के आधार पर 2006 में किया डॉक्टरों का विनियमितीकरण​ – 2005 के बाद से पेंशन बंद – किसकी गलती किसे मिल रही सजा

Share Now

सेवानिवृत्त चिकित्सा अधिकारी डॉ० वी० सी० गैरोला ने बताया कि कोषागार पेंशन निदेशालय की ओर से 14 अगस्त को जारी आदेश के अनुसार आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों को तदर्थ सेवाओं के आधार पर दिए गए वित्तीय लाभ का परीक्षण करने को कहा है। जिसमें अक्टूबर 2005 के बाद विनियमित हुए चिकित्सकों को पेंशन और सेवा का लाभ नहीं दिया जाएगा। सेवानिवृत्त चिकित्सा अधिकारियों ने उनसे पेंशन की सुविधा छीनने का विरोध किया है।

राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ(पंजीकृत) के प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ० डी० सी० पसबोला द्वारा सेवानिवृत्त आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों को पेंशन एवं सेवा के लाभ से वंचित रखने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, क्यूंकि पेंशन को जीने का अधिकार कहा गया है। उनके द्वारा जानकारी दी गयी कि 2002 की विनियमितीकरण नियमावली के आधार पर 2006 में डॉक्टरों का विनियमितीकरण​ किया गया। समय पर विनियमितीकरण न करना शासन की गलती है। अब वृद्धावस्था​ में सेवानिवृत्त डॉक्टरों से पेंशन सुविधा एवं सेवा लाभ से वंचित करने की कार्यवाही की जा रही है, जो कि सरासर गलत है।

इधर भू० पू० अपर जिला आयुर्वेदिक​ एवं यूनानी अधिकारी डॉ० जे० पी० सेमवाल द्वारा भी इस आदेश को सेवानिवृत्त चिकित्सा अधिकारियों के लिए अन्यायपूर्ण बताया तथा राज्य सरकार से इस प्रकरण पर शीघ्रातिशीघ्र​ सकारात्मक कदम उठाए जाने की मांग की गयी है। ऐसा ना हो पाने की स्थिति में मजबूरन न्यायालय की शरण में जाने की बात कही गयी है।

 
error: Content is protected !!