घर के बाहर सांप बिच्छू और मगरमच्छ का पहरा – उधार की जिंदगी कब तक।

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अगर आपको ये मालूम हो जाए की तालाब में एक दो नही बल्कि तीन-तीन मगरमच्छ है तो यक़ीनन आप उसके पास से भी नही गुजरेंगे, लेकिन कुछ ग्रामीण जान हथेली पर लेकर मगरमच्छ वाले तालाब से होकर अपने घरों तक पहुँचने को मजबूर है, ये हालात किसी पिछड़े हुए इलाके के नही बल्कि शिक्षानगरी के नाम से मशहूर रुड़की शहर के करीब बसे एक गाँव के है। जी हां तालाब में मगरमच्छ है, जहरीले सांप और बिच्छूओ का बसेरा है लेकिन उसी तालाब से होकर कुछ ग्रामीण अपनी मंजिल यानी अपने घर तक पहुँचने को मजबूर है। जान को हथेली पर लेकर जिंदगी गुजार रहे इन ग्रामीणों की पीड़ा देखकर शायद ही कोई पत्थर दिल होगा जो ना पिघले, लेकिन ये भी सच है पत्थर दिल हो चुके जनप्रतिनिधि सब कुछ जानते हुए बेख़बर बने बैठे है।

– पिरान कलियर विधानसभा का गाँव तेलीवाला जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए एक आईना है, जिसमें तमाम दावों और वादों की तस्वीर साफ़ दिखाई पड़ रही है। गाँव में दर्जनभर परिवार ऐसे है जो रोजाना मौत की राह पर चलने को मजबूर है, समाधान के लिए ग्रामीणों ने अधिकारियों और नेताओ से कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई समाधान न हो सका, थक हार कर ग्रामीण अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहे है। दरअसल गाँव में तालाब है, तालाब के आसपास कुछ ग्रामीणों के मकान है, अक्सर बरसात के दिनों में तालाब ओवरफ्लो हो जाता है और पानी तालाब से बाहर आकर मकानों में घुस जाता है, देखने पर लगता है कि मकान तालाब में बने हो, क्योंकि मकान के चारो ओर पानी ही पानी नज़र आता है, ग्रामीण बताते है कि बरसात के दिनों में पूरे गाँव के पानी की निकासी इसी तालाब में है, यही कारण है कि तालाब के आसपास बने मकान भी तालाब की जद में आजाते है, जिस कारण ग्रामीणों को कई कई फिट पानी से होकर अपने घरों तक पहुँचना पड़ता है,

– अक्सर बरसात के दिनों में सांप, बिच्छू और जहरीले जानवर पानी में निकल आते है लेकिन मगरमच्छ एक ऐसा जानवर है जिसे देखकर किसी के भी होस उड़ सकते है, रुड़की शहर का गाँव तेलीवाला जहां तालाब में सांप, बिच्छू तो है ही लेकिन इनके साथ साथ तीन मगरमच्छ भी, जी हां, आपने सही सुना, एक नही दो नही बल्कि तीन-तीन मगरमच्छ, जो कई बार ग्रामीणों के मकान के सामने या रास्ते में आजाते है, ग्रामीणों के मुताबिक़ मगरमच्छ को देखना आम बात हो गयी है, इससे भी बड़ी बात ये है कि जिस तालाब में ये मगरमच्छ रहते है उसी से होकर ग्रामीण अपने मकानों तक पहुचते है, ग्रामीणों की माने तो उन्होंने कई बार इस समस्या की शिकायत सम्वन्धित अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से की है, लेकिन आजतक समस्या का कोई समाधान नही हो पाया,, और मजबूरन ग्रामीण जान हथेली पर लेकर जिंदगी बसर करने पर मजबूर है।

ग्रामीणों ने बताया जब तेज़ बारिश हो जाती है तो घरों में भी पानी भर जाता है, तब वह मकान की छतों पर बैठकर गुजारा करते है, जहरीले जानवरो का पहरा देना पड़ता है, घरों में छोटे-छोटे मासूम बच्चे है, जिनकी चिंता उनको हमेशा सताती है, ग्रामीण बताते है कि जनप्रतिनिधि चुनाव के समय उनके पास आते है और बड़े बड़े वादे कर वोट हासिल कर लेते है लेकिन उसके बाद वहां आकर भी नही देखते, समस्याओ से निज़ात दिलाने का दम भरने वाले अधिकारी भी बेख़बर बने बैठे है, ग्रामीणों का कहना है की शायद किसी बड़े हादसे का इंतेज़ार किया जा रहा है,

हाजी फुरकान (विधायक पिरान कलियर)

मयंक गर्ग (रेंजर वन विभाग)

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