केंद्र मे मोदी सरकार के अस्तित्व मे आने के बाद बहुसंख्यक हिन्दुओ को पहली बार राजनीति मे अपनी भी भागीदारी का अहसास हुआ, मतदाताओ के साथ राजनीति के खिलाड़ियो को भी अहसास हुआ कि हिन्दू कार्ड से सत्ता हासिल ही नहीं कि जा सकती बल्कि प्रचंड बहुमत भी पाया जा सकता है | इसे अब भले ही सभी राजनैतिक दल अपने अजेंडे मे सामिल करें , पर इस बात को तो स्वीकार करना ही पड़ेगा कि पीएम मोदी ने बिपक्षियों को जनेऊ, आरती और मदिर के दर्शन के लिए कतार मे खड़ा होना सिखा दिया है | मतदाता वही था सरकारे भी वही बस सोच बदल गयी | संख्या बल के बाद भी चुनाव मे एक तरफ उपेक्षित पड़े हिन्दू समाज को इस बात कि बड़ी तसल्ली है कि उन्हे एक बार फिर से उनका खोया हुआ गौरव प्राप्त हुआ है , भले ही इसके लिए उन्हे पेट्रोल और गैस की बढ़ी हुई कीमते अदा करनी पड़ी है |
केजरीवाल भी पहुंचे रामलला की शरण में, अयोध्या दर्शन के लिए किया ‘फ्री एलान’
शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार
केंद्र में सत्ता हासिल करने के लिए राजनीति का गलियारा (रास्ता) उत्तर प्रदेश से होकर जाता है।
सभी राजनीतिक दलों के लिए यूपी की सियासत ‘दिशा’ भी तय करती रही है। एक बार फिर सूबे की सियासत चुनाव की ‘दहलीज’ पर खड़ी है। लेकिन इस बार सभी दलों के नेता अयोध्या के सहारे प्रदेश में सत्ता पर काबिज होने का सपना संजोए हुए हैं। चुनावी ‘सरगर्मी’ बढ़ते ही राम की नगरी में भी गतिविधियां बढ़ गईं हैं। भाजपा के साथ इस बार बसपा और सपा के नेता भी ‘हिंदू कार्ड’ खेलने के लिए अयोध्या के चक्कर लगा चुके हैं।
ऐसे में यूपी की सियासत में जमीन तलाशने उतरी आम आदमी पार्टी कहां पीछे रहने वाली थी।
इसी महीने 14 अक्टूबर को आप के नेता और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सांसद और यूपी प्रभारी संजय सिंह अयोध्या पहुंचे । यहां दोनों नेताओं ने रामलला के दर्शन कर तिरंगा यात्रा शुरू की । इस दौरान सिसोदिया ने कहा था कि पार्टी प्रदेश में भगवान राम के आदर्शों पर चलने वाली सरकार बनाएगी। प्रभु राम की कृपा से ही पार्टी को दिल्ली में सरकार चलाने का मौका मिला है। अब इसी कड़ी में विधानसभा चुनाव से पहले हिंदू वोटरों पर अपनी पकड़ बनाने के लिए आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी सोमवार शाम को दो दिवसीय दौरे पर रामनगरी अयोध्या पहुंचे । यहां वे सरयू नदी तट पर आरती में शामिल हुए ।
आज सुबह केजरीवाल ने हनुमानगढ़ी और रामलला के दर्शन किए। राम जन्मभूमि दर्शन के बाद केजरीवाल ने कहा कि हम दो काम करने वाले हैं एक दिल्ली में हमारी मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना है, इस योजना के तहत हम दिल्ली वासियों को फ्री में तीर्थ यात्रा का मौका देते हैं। इसमें अयोध्या को भी इन तीर्थ स्थलों की लिस्ट में सम्मिलित किया जाएगा और उत्तर प्रदेश में भी अगर हमारी सरकार बनती है तो उत्तर प्रदेश में भी हम सभी उत्तर प्रदेश वासियों को अयोध्या के दर्शन कराने के लिए सबका फ्री में अरेंजमेंट करेंगे।
अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य एवं विशाल मंदिर का निर्माण हो रहा है। फिलहाल, एक अस्थायी मंदिर में भगवान राम की प्रतिमा रखी हुई है। इस मौके पर संजय सिंह समेत आम आदमी पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। प्रदेश में कुछ महीने बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं इसलिए इस दौरे को राजनीतिक विश्लेषक सियासी नजरिए से भी देख रहे हैं। आम आदमी पार्टी विधानसभा का चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है।
भाजपा के साथ सभी दलों में अयोध्या जाने की लगी हुई है होड़—
चुनाव आते ही रामनगरी सभी नेताओं की जुबान पर चढ़ने लगती है। इस बार भाजपा के साथ बसपा, सपा और आम आदमी पार्टी के नेताओं में अयोध्या जाने की ‘होड़’ लगी हुई है।
बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने तो अयोध्या से ‘ब्राह्मण सम्मेलन’ की शुरुआत की थी। पहली बार ऐसा हुआ कि राम मंदिर निर्माण स्थल पर बसपा का कोई नेता आधिकारिक तौर पर गया हो। सतीश चंद्र मिश्र ने रामलला के दर्शन करने के साथ हनुमान गढ़ी और सरयू नदी के किनारे पूजा-अर्चना की थी। ऐसे ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी प्रदेश में अपनी सरकार आने पर भव्य राम मंदिर बनवाने का एलान कर रखा है।
गौरतलब है कि 80 के दशक से अयोध्या यूपी ही नहीं केंद्र के चुनावों में भी फोकस में रहा है। इस शहर से हिंदुओं की आस्था जुड़ी रही है। भाजपा अयोध्या और हिंदू कार्ड खेलती रही है। उसे लगातार हर चुनाव में इसका फायदा भी मिला। अयोध्या और राम एक-दूसरे का पर्याय हैं। बता दें कि भाजपा के एजेंडे में हिंदुत्व हमेशा से ‘मुखरता’ से रहा । 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद 2019 में भी यह उसके जीत का ‘फॉर्मूला’ बना। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में भी यह उसके लिए फायदेमंद साबित हुआ। दूसरी पार्टियों को भी शायद इस फॉर्मूले की मजबूती का एहसास हो गया है। यही कारण है कि बसपा सपा और आम आदमी पार्टी राम कार्ड का सियासी दांव खेलने भाजपा के पीछे-पीछे चल दी हैं। बता दें कि यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कई पार्टियों ने अयोध्या में अपना चुनावी राजनीति का ‘सेंटर’ बना रखा है।
