उत्तरकाशी : जंगल से होगी इनकम – तीन दिवसीय नेचर गाईड प्रशिक्षण

Share Now

उत्तराखण्ड़ वन विभाग द्वारा सिक्योर हिमालय परियोजना अन्तर्गत तीन दिवसीय नेचर गाईड प्रशिक्षण का आयोजन तितली ट्रस्ट के सहयोग से ग्राम बार्सू बुग्याल के समीप में किया गया।

वनों के संरक्षण के साथ अब पर्यटन को नई परिभाषा देते हुए नेचर गाइड ट्रैनिंग और इससे आजीविका उपार्जन की संभावना पर चर्चा करते हुए उत्तरकाशी वन प्रभाग ने एक कार्य शाला का आयोजन किया गया इसके लिए वन विभाग दूरबीन और कैमेरे उपलब्ध कराएगा


जानकारी देते हुए प्रभागीय वनाधिकारी पुनीत तोमर ने बताया कि प्रशिक्षण पश्चात प्रतिभागियों के साथ 15 दिवस के अंतराल में एक वर्ष तक अभ्यास प्रशिक्षण भी आयोजित किये जायेगें। समस्त प्रतिभागियों को इस 3 दिवसीय प्रशिक्षण के पश्चात 5 दूरबीन एवं 3 कैमरा अभ्यास हेतु उपलब्ध कराये जायेगें l जिनको 6 महीने के समय में उनके द्वारा की गई प्रगति के आधार पर प्रथम 5 लोगों को दूरबीन प्रदान की जायेंगी।

इस नेचर गाईड प्रशिक्षण के दौरान 80 पक्षी प्रजातियों का अवलोकन किया गया। इसमें मुख्यतः येलो रम्पड हनीगाईड, स्पाॅटेड विंगड रोज फिंच, यूरोपियन गोल्डन फिंच, एवं गोल्डन ईगल देखे गये। प्रशिक्षण का स्वरुप क्लासरुम प्रशिक्षण एवं क्षेत्र अभ्यास के रुप में रहा। उक्त प्रशिक्षण में कुल 27 लोगों ने प्रतिभाग किया जिसमें 15 स्थानीय ग्रामीण युवा, 7 पर्यटक एवं 5 वन विभाग के अधिकारी सम्मिलित है।

गौरतलब है कि जिन तीन पक्षी विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उनमें से केसर सिंह जो देवलसारी उत्तराखण्ड़ के निवासी है, जिन्होनें अपनी यह यात्रा 7 वर्ष पूर्व इसी प्रकार से आरम्भ की और आज वह ई-बर्ड एप पर टाॅप सहयोग कर रहे है । जो कि बाकी प्रशिक्षार्थीयों के लिए एक आदर्श नेचर गाईड हो सकते है।

गढवाल क्षेत्र विशेषकर गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क के भिन्न प्रकार के आवास जो सब टाॅपीकल वन बुग्याल क्षेत्र, उच्च हिमालयी आद्रभूमियाॅ, उच्च जैव विविधता एवं पर्यटक उपलब्ध के बावजूद बहुत ही सीमित संख्या में प्रकृृति गाईड है। इस प्रकार के लगभग प्रशिक्षण स्थानीय युवाओं में बर्ड़ वाॅचिंग की जानकारी के साथ ही प्रकृृति के बारे में जानकारी एवं उनके व्यक्तित्व निखार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। इसके साथ ही इस भू-क्षेत्र में भैरोघाटी के समीप लंका नामक स्थान पर बन रहे हिम तेंन्दुआ संरक्षण केन्द्र, ऐतिहासिक गंरतांगली का पर्यटकों के लिए खुलना एवं ट्रांस हिमालय में पर्यटकों का जाना नेचर गाईड आधारित आजीविका में सहयोग करेगा। उत्तराखण्ड़ राज्य जैव विविधता बोर्ड गंगोत्री भू-क्षेत्र में जैव विविधता आंकलन कर ज्ञान उत्पन करेगा जो पक्षी अवलोकन एवं प्रकृृति गाईड में मदद करेंगे। कार्यक्रम का समापन प्रशिक्षार्थियों के फीडबैक के साथ किया गया l

इस अवसर पर वनक्षेत्राधिकारी संजय कुमार, लाखीराम आर्य, संजय सोंधी पक्षी विशेषज्ञ तितली ट्रस्ट, उम्मेद धाकड़ परियोजना सहायक, सिक्योर हिमालय परियोजना एवं अन्य अधिकारी/ कर्मचारी मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!