उत्तरकाशी : इसलिए त्रिकोणिय होगा गंगोत्री मे विधानसभा चुनाव – दांव पर है – सरकार बनाने वाला गंगोत्री का मिथक

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उत्तरकाशी

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उत्तराखंड मे हर उपभोक्ता को 300 यूनिट बिजली हर महीने  मुफ्त देने के अपने चुनावी ऐलान को मिशन 2022 मे अचूक बाण मानकर चल  रही आम आदमी पार्टी ने जनता के बीच मजबूत पकड़ बानने के लिए इसे गारंटी कार्ड के रूप मे अभी से अपने मत दाताओ /उपभोक्ताओ के बीच बांटना सुरू कर दिया है |

उत्तरकाशी जिल मुख्यलाय स्थित पार्टी के कार्यालय से गंगोत्री, यमुनोत्री और पुरोला विधानसभा के मतदाताओ  के लिए शुक्रवार  से इस अभियान की सुरुवात  की गयी है  |

पार्टी कार्यालय मे आयोजित पत्रकार वार्ता मे आप की पुष्पा चौहान और राजेंद्र बूटोला ने बताया कि उपभोक्ताओ को एक फार्म भरवाया जा रहा है |  पार्टी के नंबर पर मिस काल के बाद एक ओटीपी मिलेगा जिसे कार्ड और फार्म दोनों जगह अंकित किया जाएगा | इसे आम आदमी पार्टी की  सरकार बनने के बाद 300 यूनिट मुफ्त बिजली का गारंटी कार्ड के रूप मे इस्तेमाल किया जा रहा है |

 हालांकि सरकार बनाने के बाद उत्तराखंड मे सभी को यह सुविधा मिलने का दावा किया जा रहा है, ऐसे मे कार्ड की उपभोक्ताओ को कितनी उपयोगिता रहेगी इसका कोई ठोस जबाब नहीं मिल सका |

 फिलहाल सरकार आप कि  बने या किसी और की,  आम आदमी पार्टी को मतदाताओ का नाम, पता, मोबाइल फोन नंबर  सहित सभी आंकड़ा मिल जाएगा, जिसके बाद कम से कम पार्टी को प्रदेश मे  अपने समर्थको की तादाद का भी पता चल सकेगा |

हालांकि उत्तराखंड मे आम आदमी पार्टी प्रत्यासियों को  चुनाव खर्च जुटाने के अलावा फिलहाल  बहुत कुछ हासिल नहीं कर रही है किन्तु पार्टी मे सामिल सेवा निवृत्त कर्नल अजय कोठियाल  का अपना जनाधार और वोट बैंक है साथ ही एक बड़ी टीम उनके एक इशारे पर कुछ भी करने के लिए 24 घंटे तैयार रहती है | ऐसे मे बीजेपी से न्यूट्रल मतदाता और कॉंग्रेस से नाराज और उपेक्षित मतदाता कर्नल अजय कोठियाल की पार्टी के लिए खाद का काम कर सकते  है |

प्रदेश मे अब तक बीजेपी और कॉंग्रेस को बारी बारी सत्ता सौंपने वाली उत्तराखंड की जनता के पास यूकेडी और  बीएसपी को आजमाने के बाद एक और विकल्प मौजूद होगा | हालांकि अभी भी राजनैतिक रूप से पार्टिया आम आदमी पार्टी को उत्तराखंड विरोधी करार देती रही है |

खासकर गंगोत्री विधानसभा मे अगर मतदाताओ की मानसिकता की बात करे तो हर चुनाव मे लोगो ने एक पार्टी प्रत्यासी से नाराज होकर दूसरे  को वोट किया गया है और अगली बार फिर दूसरे से नाराज होकर पहले वाले का समर्थन किया है | मतदाताओ की मजबूरी और विकल्प हीनता की स्थिति को समझते  हुए भी कोई तीसरा मैदान मे अब तक जगह नहीं बना सका | राज्य बनने के बाद पहली बार गंगोत्री विधानसभा मे मुक़ाबला त्रिकोणीय होने के आसार बन गए है |

वैसे भी गंगोत्री विधान सभा मे अब तक मतदाताओ का रुख  कॉंग्रेस पार्टी के हिसाब से नहीं बल्कि विजयपाल सजवान के नाम से और  बीजेपी मे  स्व0 गोपाल रावत के नाम पर वोट पड़े है | कॉंग्रेस मे संगठन विधायक कि जेब मे रहा और बीजेपी मे संगठन ज़्यादातर मौको  पर विधायक से नाराज रहा |  नाराजी के हिसाब से इस बार कॉंग्रेस की  बारी थी किन्तु बीजेपी के विधायक के  अचानक निधन से  स्थिति आसान नहीं रही | कॉंग्रेस के विधायक के  प्रत्यासी मुखर होकर अपने एक दौर के साथी के कार्यकाल के खिलाफ उस आवेश से नहीं बोल पाएंगे आखिर रावत परिवार से उनके पारिवारिक संबंध जो रहे है, वही  बीजेपी मे नए चेहरे को  टिकट मिलने की  उम्मीद मे दर्जनो संभावित प्रत्यासियों के मतदाताओ के लिए सीएचएल रहे  ऑक्सिजन कैंप बदली परिस्थिति मे अचानक बंद हो गए है | इधर बीजेपी मे गंगोत्री से स्वर्गीय विधायक की पत्नी शांति रावत ने पार्टी से टिकट का दावा ठोक  दिया है |

अब कर्नल अजय कोठियाल से साथ जुड़े युवा भी  यही तर्क देकर खुद को संतुष्ट कर रहे है | वे कहते है जब गंगोत्री मे कॉंग्रेस(विजयपाल ) और बीजेपी (गोपाल रावत ) के नाम पर अभी तक वोट पड़ सकते है तो आप ( कर्नल अजय कोठियाल ) के नाम पर वोट क्यो नहीं पड़ सकते है ? रही पार्टी से नाराजी की बात –  तो लोगो की बीजेपी और कॉंग्रेस दोनों बड़ी पार्टियो से भी नाराजी रही ही  है पर वोट तो व्यक्ति के नाम से पड़ा ही है |   

अब अगर गंगोत्री से आप के कर्नल कोठियाल चुनाव जीत जाते है तो गंगोत्री का मिथक कायम रहे इसके लिए प्रदेश मे उन्ही (आप ) की सरकार बननी चाहिए जो फिलहाल नजर नहीं आ रहा है,  ऐसे मे या तो मिथक टूटेगा या निरदलियों से मिली जुली सरकार बनेगी अथवा गंगोत्री कर्नल को बाय बाय कहेगी ?  – अब देखना है कि मिथक कायम रखने के लिए गंगोत्री इस बार कौन से विकल्प पर विचार करती है

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