क्या आप कभी अपनी मां की गोद में बैठे हैं?
कभी आपने अपनी मां की गोद को गंदा किया है ?
उसमें पेशाब किया है ?
जरूर किया होगा, उस वक्त जब आप
नासमझ थे छोटे थे ,
लेकिन अगर आप आज भी अपनी मां की गोद में पेशाब कर रहे हैं , उसे गंदा कर रहे हैं तो आपको मॉडर्न समझा जाए या बेवकूफ?
मां सिर्फ वही नहीं है जो 9 महीने आपको अपने गर्भ में धारण करती है सबसे बड़ी मां तो यह पृथ्वी है , यह प्रकृति है जो पूरे मानव सभ्यता को अपने में समाए हुए हैं, और इसी प्रकृति को देखने के लिए पर्यटक बन कर जब हम इसकी की गोद में जाते हैं तो वहां अपने पैसों से खरीदा हुआ कबाड़ कैसे छोड़ कर चले जाते हैं ?
जो कबाड उस प्रकृति का हिस्सा है ही नहीं उसे हम पैसों में खरीद कर अपनी पीठ पर ढोकर वहां जाकर छोड़ आते हैं।
उस माँ को कैसा लगता होगा ?
हम बात कर रहे हैं प्रसिद्ध पर्यटक स्थल नचिकेता ताल की जो ना सिर्फ धार्मिक स्थल रूप से बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी अति महत्वपूर्ण है।
हम पर्यटन बढ़ाने की बड़ी-बड़ी बात तो करते हैं शिक्षित होने की भी बात करते हैं ,।
लेकिन जब हम इस ताल को घूमने जाते हैं तो वहां टॉफी कुरकुरे चिप्स टौफ़ी पर शराब और पानी की बोतलें वहीं छोड़ आते हैं
अब हर काम के लिए सरकारी विभाग और पुलिस तो मौजूद रहेगी नहीं, कुछ काम तो ऐसे हैं जो हमें अपने आप तय करने हैं और खुद की निगरानी भी करनी है
रामचंद्र उनियाल पीजी कॉलेज उत्तरकाशी के बीएससी सेकंड ईयर के छात्रों ने वनस्पति विज्ञान के आध्यान के लिए नचिकेता ताल का भ्रमण किया तो यह देखकर उन्हें बड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई कि उनकी पीढ़ी के लोग ऐसा कुछ कर रहे हैं खास बात यह है कि यह छात्र वनस्पति विज्ञान के ही छात्र हैं और उन्हें मालूम है कि यहां पर यदि प्लास्टिक बदता रहा तो कोई भी पेड़ पौधे उग नहीं सकते
चलिये सुनाते हैं आपको विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ महेंद्र पाल का वहां पर क्या पाया